शुक्रवार, मार्च 23, 2018

मंगलवार के टोटके | Tuesday Totke

मंगलवार को हनुमानजी का दिन होता है। जिसे हनुमान जी का आशीर्वाद मिल गया तो समझो उसके सारे काम हो गए। मंगलवार को करें यह टोटके/उपाय, बन जाएगा बिगड़ा काम।

मंगलवार के टोटके/उपाय

1. आप मंगलवार के दिन राम मंदिर में जाएं और दाहिने हाथ के अंगुठे से हनुमान जी के सिर से सिंदूर लेकर सीता माता श्री चरणों में लगा दें इससे आपकी हर मनोकामना पूरी हो जाएगा।

2. मंगल के दिन सुबह के दिन एक धागे में चार मिर्चें नीचे डालकर उसके ऊपर नींबू डालें और फिर उसके ऊपर तीन मिर्चें और लगाए। इसके बद इसे घर और व्यवसाय के दरवाजे पर लटका दें। इससे नकारात्मकता खत्म हो जाएगी और सकारात्मकता का संचार होगा।

3. मंगलवार के दिन पीपल के 11 पत्ते लेकर साफ जल से धो लें। इन पत्तों पर चंदन या कुमकुम से प्रभु श्रीराम का नाम लिखें। इसके बाद हनुमान जी के मंदिर में जाकर इन पत्तों को अर्पित कर दें। इससे जीवन के दुख कम होंगे।

4. प्रत्येक मंगलवार को नजदीकी मंदिर में जाकर हनुमान जी को बनारसी पान अर्पित करें। ऐसा करने से आपके जीवन में हमेशा हनुमान जी की कृपा बनी रहेगी और आपके सभी काम बनते रहेंगे।

5. मंगलवार को सुबह लाल गाय को रोटी देना शुभ है।

6. मंगलवार को हनुमान मंदिर या गणेश मंदिर में नारियल रखना अच्छा माना जाता है।

7. मिटटी के बर्तन में हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाये , फिर गरीबो को दान कर दे

8. मंगलवार को हनुमान मंदिर में तुलसी का पत्ता चढ़ाए

9. राम लिखी लाल रंग की ध्वजा मंगलवार को हनुमान जी को चढ़ाए

10. मंगलवार के दिन लाल चंदन,लाल गुलाब के फूल तथा रोली को लाल कपड़े में बांधकर एक सप्ताह के लिए मंदिर में रख दें. एक सप्ताह के बाद उनको घर की तथा दुकान की तिजोरि में रख दें

11. प्रत्येक मंगलवार को बच्चे के सिर पर से कच्चा दूध 11 बार वार कर किसी जंगली कुत्ते को शाम के समय पिला दें

12. सुबह सूरज उगने के समय एक गुड का डला लेकर किसी चौराहे पर जाकर दक्षिण की ओर मुंह करके खडे हो जांय ! गुड को अपने दांतों से दो हिस्सों में काट दीजिए ! गुड के दोनो हिस्सों को वहीं चौराहे पर फेंक दें और वापिस आ जांय

13. लगातार आठ मंगलवार हनुमान जी के मंदिर एक नारियल ले कर जाये उसके सिंदूर से स्वस्तिक बनाये हनुमान जी को अर्पित कर वहां बैठ कर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करे

14. मंगलवार के दिन एक साबुत पानी वाला नारियल लेकर उसे बीमार व्यक्ति के सिर पर से 21 बार उसार कर किसी मंदिर की आग में डाल दें। साथ ही हनुमानजी की प्रतिमा को चोला चढ़ाकर हनुमानचालिसा पढ़े।।।।।।।।।

*अपना घर बनाने के उपाय

*अपना घर बनाने के उपाय*

इस धरती में हर व्यक्ति चाहता है कि उसका अपना खुद का घर हो , जहां वह अपनी मनमर्जी के अनुसार रह सके, खा पी सके , उसे सजा सँवार सके, अपने परिवार के सदस्यों के साथ जीवन व्यतीत कर सके व्यक्ति के जीवन की कमाई, उसकी पहचान उसका अपना भवन होता है।
लेकिन यह भी सत्य है कि आज की महँगाई के दौर में अपने लिए किसी अच्छी , सुरक्षित और जहाँ पर आधारभूत सुविधाएँ हो ऐसी जगह घर बना पाना एक टेढ़ी खीर भी है। दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी किराये के मकानों में रहती है।
स्वयं की भूमि अथवा मकान बनाने के लिए चतुर्थ भाव का बली होना आवश्यक होता है, मंगल ग्रह को भूमि,भवन का और चतुर्थ भाव का कारक माना जाता है,
अगर आप भी चाहते हैं आपका अपना घर, तो यहाँ पर बताये जा रहे कुछ उपायों को अवश्य ही करें .इनको करने से शीघ्र ही आपके घर खरीदने के योग बनेंगे , मार्ग में आने वाली बाधाएं शान्त होगी ।

* ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल या शनि ग्रह से संबंधित कोई ग्रह दोष हो तो उसे अपने घर का सपना पूरा करने में तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसलिए अपनी कुंडली किसी अच्छे ज्योतिष को दिखाकर मंगल और शनि के उपाय अवश्य ही कर लें ।

* मंगल को भूमि तो शनि को निर्माण का कारक माना गया है। इसलिए जब भी दशा/अन्तर्दशा में मंगल व शनि का संबंध चतुर्थ/चतुर्थेश से बनता है, तब व्यक्ति अपना घर बनाता है उसे भूमि , प्रापर्टी डीलिंग के कार्यों में श्रेष्ठ सफलता मिलती है ।

* अपने घर की चाह रखने वाले जातक नित्य प्रात: स्नान कर गणेशजी को दूर्वा और एक लाल फूल चढ़ाएं। ऐसा लगातार 21 दिन तक करते हुए भगवान श्री गणेश जी से अपने घर की समस्या के निवारण के लिए प्रार्थना करें।

* अपने घर बनवाने के मार्ग में किसी भी प्रकार की अड़चनों को दूर करने के लिए किसी भी मंदिर में एक नीम की लकड़ी का बना हुआ छोटा सजा-संवरा सा घर दान करें।

* अपना घर बनवाने के योग मजबूत करने के लिए मंगलवार के दिन सफेद गाय और उसके बछड़े को लाल मसूर की दाल व गुड़ और घोड़े को चने की भीगी हुई दाल खिलाएं।

* नित्य कौए को दूध में भीगी रोटी और तोतों को सप्तधान डालें। इससे आर्थिक पक्ष मजबूत होने लगता है धीरे धीरे अपना स्वयं का घर बनाने की परिस्थितियाँ बनने लगती है ।

*मंगलवार को लाल मसूर की दाल का दान करने से भी अपना भवन बनाने के योग प्रबल होते हैं ।

* अपने घर के पूजा स्थल अथवा ईशान दिशा में एक मिट्टी का छोटा घर लाकर रखें और उसमें हर रविवार को सरसो तेल का दीपक जलाएं और दीपक जलने के बाद उसमें फिर से कपूर जलाएं। इस मिटटी के घर को भी अपने हाथ से खूबसूरत तरीके से सजाएं। इससे भी ग्रह निर्माण में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती है ।

* मान्यताओं के अनुसार यदि किसी घर में चिडिय़ा या गिलहरी अपना घोंसला बना लें तो उस घर में सुख शांति, धन समृद्धि की कोई भी कमी नहीं होती। अत: यदि वह आपके घर में अपना घोसला बना लें तो उसे जबरन हटाना नहीं चाहिए ।
घर में चिडिय़ा का घोंसला बनना शुभ संकेत माना जाता है। कहते है की जिन घरों में चिडिय़ा का घोंसला होता है वहां सभी देवी-देवताओं की असीम कृपा बनी रहती है। उस घर के लोगो को अपना मनचाहा भवन का सुख प्राप्त होता है ।

* जिन लोगों को अपना मकान खरीदने या बनाने की इच्छा है लेकिन कोई न कोई रूकावट लगी रहती है तो वह रविवार से शुरू करके नित्य प्रात: गाय को गुड़ खिलाएं। इस उपाय को पूर्ण श्रद्धा पूर्वक लगातार करने से गौ माता की कृपा से अपना मकान खरीदने में आने वाली समस्त बाधाएं दूर होने लगती है ।

* अगर आप अपना स्वयं का मकान बनाना चाहते हैं, तो शुक्ल पक्ष के शुक्रवार अथवा नवरात्र के किसी भी दिन एक लाल कपड़े में छ: चुटकी कुमकुम, छ: लौंग, नौ बिंदिया, नौ मुट्ठी साफ़ मिट्टी और छ: कौड़ियाँ लपेट कर किसी भी नदी / बहते हुए पानी में मन ही मन में अपनी मनोकामना कहते हुए विसर्जित कर दें । इस उपाय से माँ दुर्गा की कृपा से शीघ्र ही अपना मकान बनाने में सफलता मिलेगी ।

* अपनी मनचाही जमीन अथवा अपना मनचाहा मकान पाने के लिए नवरात्र अथवा शुक्ल पक्ष के शुक्रवार को एक उपाय करें । जहाँ पर आप मकान चाहते है उस स्थान की थोड़ी सी मिट्टी लाकर उसे एक कांच की शीशी में डालें । फिर उस शीशी में गंगा जल और कपूर डाल कर घर के ईशान कोण अथवा अपने पूजा घर पर जौ के ढेर पर स्थापित करें । फिर शुक्रवार से नित्य / पूरे नवरात्र उस शीशी के आगे माता का सिद्ध नवार्ण मन्त्र ‘ "ऐं हीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे" ‘ की पांच माला जप करें और उस जौ के ढेर में गंगा जल डालते रहे । नवें दिन / नवमी के दिन हवन के बाद थोड़े से अंकुरित जौ निकाल कर उसे अपनी मन चाही जगह पर डाल दें । काँच की शीशी के अंदर की सामग्री को नदी में विसर्जित कर दें और कांच की खाली शीशी को नदी में न डालकर पीपल के पेड़ के नीचे रख दें । माँ दुर्गा की कृपा से आपको मनचाहा घर मिलने के प्रबल योग बनेगे ।....................................  

*उत्तम मनचाही संतान प्राप्ति के लिए कुछ खास उपाय*

🌻🌹 *श्री गणेशाय नमः* 🌹🌻

*उत्तम मनचाही संतान प्राप्ति के लिए कुछ खास उपाय*

*यदि किसी दम्पति को संतान की प्राप्ति नहीं हो रही है तो वह स्त्री शुक्ल पक्ष में अभिमंत्रित संतान गोपाल यंत्र को अपने घर में स्थापित करके लगातार 16 गुरुवार को ब्रत रखकर केले और पीपल के वृक्ष की सेवा करें उनमे दूध चीनी मिश्रित जल चड़ाकर धुप अगरबत्ती जलाये फिर मासिक धर्म से ठीक तेहरवीं रात्रि में अपने पति से रमण करें संतान सुख अति शीघ्र प्राप्त होगा ।*

*पति पत्नी गुरुवार का ब्रत रखें या इस दिन पीले वस्त्र पहने , पीली वस्तुओं का दान करें यथासंभव पीला भोजन ही करें .....अति शीघ्र योग्य संतान की प्राप्ति होगी ।*

*संतान सुख के लिए स्त्री गेंहू के आटे की 2 मोटी लोई बनाकर उसमें भीगी चने की दाल और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर नियमपूर्वक गाय को खिलाएं ...शीघ्र ही उसकी गोद भर जाएगी ।*

*शुक्ल पक्ष में बरगद के पत्ते को धोकर साफ करके उस पर कुंकुम से स्वस्तिक बनाकर उस पर थोड़े से चावल और एक सुपारी रखकर सूर्यास्त से पहले किसी मंदिर में अर्पित कर दें और प्रभु से संतान का वरदान देने के लिए प्रार्थना करें ...निश्चय ही संतान की प्राप्ति होगी ।*

*किसी भी गुरुवार को पीले धागे में पीली कौड़ी को कमर में बांधने से संतान प्राप्ति का प्रबल योग बनता है।*

*संतान प्राप्ति के लिए स्त्री पारद शिवलिंग का नियम से दूध से अभिषेक करें ...उत्तम संतान की प्राप्ति होगी ।*

*हर गुरुवार को भिखारियों को गुड का दान देने से भी संतान सुख प्राप्त होता है।*

*पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में आम की जड़ को लाकर उसे दूध में घिसकर पिलाने से स्त्री को अवश्य ही संतान की प्राप्ति होती है यह अत्यंत ही सिद्ध / परीक्षित प्रयोग है ।*

*रविवार को छोड़कर अन्य सभी दिन निसंतान स्त्री यदि पीपल पर दीपक जलाये और उसकी परिक्रमा करते हुए संतान की प्रार्थना करें उसकी इच्छा अति शीघ्र पूरी होगी ।*

*उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में नीम की जड़ लाकर सदैव अपने पास रखने से निसंतान दम्पति को संतान सुख अवश्य प्राप्त होता है ।*

*नींबू की जड़ को दूध में पीसकर उसमे शुद्ध देशी घी मिला कर सेवन करने से पुत्र प्राप्ति की संभावना बड़ जाती है ।*

*माघ शुक्ल षष्ठी को संतानप्राप्ति की कामना से शीतला षष्ठी का व्रत रखा जाता है। कहीं-कहीं इसे ‘बासियौरा’ नाम से भी जाना जाता हैं। इस दिन प्रात:काल स्नानादि से निवृत्त होकर मां शीतला देवी का षोडशोपचार-पूर्वक पूजन करना चाहिये। इस दिन बासी भोजन का भोग लगाकर बासी भोजन ग्रहण किया जाता है ।*

*उत्तम पुत्र प्राप्ति हेतु स्त्री को हमेशा पुरूष के बायें तरफ़ सोना चाहिये. कुछ देर बांयी करवट लेटने से दायां स्वर और दाहिनी करवट लेटने से बांया स्वर चालू हो जाता है. इस स्थिति में जब पुरूष का दांया स्वर चलने लगे और स्त्री का बांया स्वर चलने लगे तभी दम्पति को आपस में सम्बन्ध बनाना चाहिए. इस स्थिति में अगर गर्भादान हो गया तो अवश्य ही पुत्र उत्पन्न होगा. कौन सा स्वर चल रहा है इसकी जांच नथुनों पर अंगुली रखकरकर सकते है ।*

*योग्य कन्या संतान की प्राप्ति के लिये स्त्री को हमेशा पुरूष के दाहिनी और सोना चाहिये. इस स्थिति मे स्त्री का दाहिना स्वर चलने लगेगा और स्त्री के बायीं तरफ़ लेटे पुरूष का बांया स्वर चलने लगेगा. इस स्थिति में अगर गर्भ ठहरता है तो निश्चित ही सुयोग्य और गुणवान कन्या प्राप्त होगी ।*

*कुछ राते ये भी है जिसमे हमें सम्बन्ध बनाने से बचना चाहिए .. जैसे अष्टमी, एकादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णिमा और अमवाश्या ।*

*गर्भाधान के लिए ऋतुकाल की आठवीं, दसवी और बारहवीं रात्रि सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इन रात्रियों में सम्बन्ध बनाने के बाद स्त्री के गर्भधारण करने से संतान की कामना रखने वाले दम्पतियों को श्रेष्ठ संतान की प्राप्ति की सम्भावना बहुत बड़ जाती है ।*

*यदि आप अति उत्तम गुणवान संतान प्राप्त करना चाहते हैं,तो यहाँ दी गयी माहवारी के बाद की विभिन्न रात्रियों की महत्वपूर्ण जानकारी का अवश्य ही ध्यान रखें ।*

*चौथी रात्रि के गर्भ से पैदा हुए पुत्र की आयु कम होती है और उसे जीवन में धन के आभाव का सामना करना पड़ता है।*

*पाँचवीं रात्रि के गर्भ से जन्मी कन्या को भविष्य में पुत्र रत्न की सम्भावना क्षीण होगी वह सिर्फ लड़की ही पैदा करेगी।*

*छठवीं रात्रि के गर्भ से पुत्र उत्पन्न होगा जो मध्यम आयु वाला होगा।*

*सातवीं रात्रि के गर्भ से पैदा होने वाली कन्या बांझ होती है, वह भविष्य में संतान को जन्म देने में असमर्थ होगी।*

*आठवीं रात्रि के गर्भ से पैदा पुत्र धनी होता है, वह जीवन में समस्त ऐश्वर्य को प्राप्त करता है।*

*नौवीं रात्रि के गर्भ से उत्पन्न पुत्री धनवान होती है उसे अपने जीवन में समस्त ऐश्वर्य प्राप्त होते है।*

*दसवीं रात्रि के गर्भ से बुद्धिमान पुत्र जन्म लेता है।*

*ग्यारहवीं रात्रि के गर्भ से चरित्रहीन पुत्री का जन्म होता है ।*

*बारहवीं रात्रि के गर्भ से पुरुषोत्तम पुत्र जन्म लेता है।*

*तेरहवीं रात्रि के गर्भ से वर्णसंकर पुत्री जन्म लेती है।*

*चौदहवीं रात्रि के गर्भ से भाग्यशाली उत्तम पुत्र का जन्म होता है।*

*पंद्रहवीं रात्रि के गर्भ से अति सौभाग्यवती पुत्री जन्म लेती है।*

*सोलहवीं रात्रि के गर्भ से अपने कुल का नाम रोशन करने वाला सर्वगुण संपन्न, पुत्र पैदा होता है।*

*अगर स्त्री किसी भी कारणवश गर्भ धारण नहीं कर पा रही हो तो पति पत्नी मंगलवार के दिन कुम्हार के घर जाकर उससे प्रार्थना कर मिट्टी के बर्तन बनाने वाला डोरा ले आएं।फिर उसे किसी गिलास में जल भरकर डाल दें। कुछ समय पश्चात उस डोरे को निकाल कर वह पानी पति-पत्नी दोनों पी लें। यह क्रिया केवल मंगलवार को ही करनी है और उस दिन पति-पत्नी अवश्य ही सम्बन्ध बनांये। गर्भ ठहरते ही उस डोरे को मंदिर में हनुमानजी के चरणों में रख दें और हनुमान जी से अपने सुरक्षित प्रसव के लिए प्रार्थना करें ।*

*अगर इच्छुक महिला रजोधर्म से मुक्ति पाकर लगातार तीन दिन चावल का धोवन यानी मांड में एक नीबू निचोड़कर पीने के बाद उत्साह से पति के साथ सम्बन्ध बनाये तो उसको निश्चित ही स्वस्थ पुत्र की प्राप्ति होती है। गर्भ न ठहरने तक प्रतिमाह यह प्रयोग तीन दिन तक करें, गर्भ ठहरने के बाद नहीं करें।*

*गर्भाधान के दिन से ही स्त्री को चावल की खीर, दूध, भात, रात को सोते समय दूध के साथ शतावरी का चूर्ण, प्रातः मक्खन-मिश्री, जरा सी पिसी काली मिर्च मिलाकर ऊपर से ताजा कच्चा नारियल व सौंफ खाते रहना चाहिए, यह पूरे नौ माह तक करना चाहिए, इससे होने वाली संतान गोरी और पूर्ण स्वस्थ होती है।*

*गर्भिणी स्त्री ढाक (पलाश) का एककोमल पत्ता घोंटकर गौदुग्ध के साथ रोज़ सेवन करे | इससे बालक शक्तिशाली और गोरा होता है | माता-पीता भले काले हों, फिर भी बालक गोरा होगा |*

*सवि का भात और मुंग की दाल खाने से बाँझ पन दूर होता है और पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है ।*

*गर्भ का जब तीसरा महीना चल रहा हो तो गर्भवती स्त्री को शनिवार को थोडा सा जायफल और गुड़ मिलाकर खिलाने से अवश्य ही पुत्र रत्न की प्राप्ति होगी ।*

*पुराने चावल को धोकर भिगो दें बनाने से पहले उसके पानी को अलग करके उसमें नीबूं की जड़ को महीन पीसकर उस पानी को स्त्री पी कर अपने पति से सम्बन्ध बनाये वह स्त्री कन्या को जन्म देगी

मंगलवार, मार्च 20, 2018

गोमती चक्र के तांत्रिक प्रयोग

गोमती चक्र के तांत्रिक प्रयोग

================

गोमती चक्र की बनावट को देखा जाये तो उसके ऊपर चिकने भाग पर हिन्दी के ७ का अंक बना मिलता है,वर्तमान के ज्योतिषियों के अनुसार यह अंक राहु का अंक कहा जाता है और पानी की वस्तु जिसे चन्द्रमा का रूप दिया जाता है उसके अन्दर इस अंक के होने से यह राहु कृत प्रभावो को दूर रखने के लिये अपनी युति को प्रदान करता है साथ ही बेकार की शंका को दूर रखने मे सहायक होता है,जिनकी कुंडली मे राहु चन्द्र की युति होती है वह इसे चांदी की अंगूठी या पेंडल मे बनवाकर धारण कर सकते है।

होली, दिवाली और नव रात्रों आदिपर गोमती चक्र की विशेष पूजा होती है। सर्वसिद्धि योग, अमृत योग और रविपुष्य योग आदि विभिन्न मुहूर्तों पर गोमती चक्र की पूजा बहुत फलदायक होती है।

प्रयोग ----

1 किसी भी रवि पुष्य को गोमती चक्र प्राप्त कर चांदी की डिब्बी मेँ इत्र लगाकर पूजन स्थान पर घर मेँ रखेँ शांती बनी रहेगी

2 व्यपारियोँ को एक बर्तन मे गोमती चक्र रख कर पानी से बर्तन भर देँना चाहिए। नित्य पानी बदलतेँ रहे तो व्यापार मेँ लाभ होता है

3 एक गोमती चक्र को 11 श्वेत गुंजा के साथ कपडे मे लपेट कर रोगी के सर के नीचे रखेँ तो रोगी को जल्दी आराम हो जाता है

4 इसे अपने बच्चे के गले मे बांध दे तो नजर नही लगती

5 अपने जन्मांक की संख्या मे जेब मे रख अदालत जावेँ मुकद्दमे के चक्कर से छूट जाऐँगेँ
6 शत्रु पग की मिट्टी के साथ गोमती चक्र जल मे प्रवाहित करेँ तो शत्रुता त्याग मित्र बने सर्व जन आकर्षण प्रयोग है

7 तांबे के पात्र मे सात चक्र रख उसका पानी पीने से उदर रोग जड से समाप्त होते हैँ
8 चार गोमती चक्र अपने सर से उतार कर चारो दिशाओ मे शुक्ल पक्ष के बुधवार के दिन फेँक आवेँ ताँत्रिक अभिकर्म खत्म होता है।

9 गोमती चक्र की भस्म शहद मे मिलाकर पैरो के नाखून मे लगाने के बाद वात का दर्द दूर होता देखा गया है। साथ ही पैर के अंगूठे मे लगाने के बाद नेत्र ज्योति भी बढती देखी गयी है।

10 गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी मे मिलता है। विभिन्न तांत्रिक कार्यो तथा असाध्य रोगों में इसका प्रयोग होता है। असाध्य रोगों को दुर करने तथा मानसिक शान्ति प्राप्त करने के लिये लगभग 10 गोमती चक्र लेकर रात को पानी में डाल देना चाहिऐ। सुबह उस पानी को पी जाना चाहिऐ । इससे पेट संबंध के विभिन्न रोग दुर होते है।

11 धन लाभ के लिऐ 11 गोमती चक्र अपने पुजा स्थान मे रखना चाहिऐ उनके सामने ॐ श्री नमः का जाप करना चाहिऐ। इससे आप जो भी कार्य करेंगे उसमे आपका मन लगेगा और सफलता प्राप्त होगी । किसी भी कार्य को उत्साह के साथ करने की प्रेरणा मिलेगी।

12 गोमती चक्रों को यदि चांदी अथवा किसी अन्य धातु की डिब्बी में सिंदुर तथा अक्षत डालकर रखें तो ये शीघ्र फलदायक होते है।
13 यदि घर में भूत-प्रेतों का उपद्रव हो तो दो गोमती चक्र लेकर घर के मुखिया के ऊपर घुमाकर आग में डाल दें तो घर से भूत-प्रेत का उपद्रव समाप्त हो जाता है।

14 प्रमोशन नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर शिव मंदिर में शिवलिंग पर चढ़ा दें और सच्चे ह्रदय से प्रार्थना करें। निश्चय ही प्रमोशन के रास्ते खुल जाएंगे।

15 यदि घर में बीमारी हो या किसी का रोग शांत नहीं हो रहा हो तो एक गोमती चक्र लेकर उसे चांदी में पिरोकर रोगी के पलंग के पाये पर बांध दें। उसी दिन से रोगी को आराम मिलने लगता है

ग्रहों_एवम_उनसे_सम्बंधित_व्यवसाय

#ग्रहों_एवम_उनसे_सम्बंधित_व्यवसाय

व्यवसाय का प्रश्न मानव के लिए सदैव से बहुत महत्वपूर्ण रहा है। समय पर उचित मार्गदर्शन का अभाव ,अपनी रूचि व प्रकृति के अनुसार शिक्षा का न होना एवम भविष्य का अज्ञान इत्यादि अनेक कारणों से आज के युवकों को अपनी योग्यता व  पसंद का रोजगार नहीं मिलता। अनेक युवकों ने शिक्षा व विशेषज्ञता  किसी और क्षेत्र में प्राप्त की है पर व्यवसाय किसी अन्य क्षेत्र में कर रहें हैं। इस से न तो वे अपने साथ न्याय करते हैं और न ही व्यवसाय के साथ  निश्चित जन्म कुंडली से मार्ग दर्शन ले कर यदि हम उनकी प्रकृति व संभावित व्यवसाय के अनुरूप अपने बच्चों की शिक्षा का स्वरूप निश्चित करें तो उन्हें किसी अनिश्चय का सामना नहीं करना पड़ेगा। किसी व्यक्ति की वृत्ति क्या होगी , आजीविका स्वदेश में होगी या विदेश में ,सरकारी सेवा करेगा या व्यापार ,किन पदार्थों के क्रय -विक्रय से लाभ या हानि होगी , व्यवसाय में सफलता या असफलता का संभावित समय इत्यादि प्रश्नों के विषय में  व्यक्ति की जन्म कुंडली या प्रश्न कुंडली  उचित मार्ग दर्शन प्रदान कर सकती है। जन्मकुंडली या प्रश्नकुंडली के दशम एवम सप्तम भाव से व्यक्ति के व्यवसाय का विचार किया जाता है। लग्न ,चन्द्र व सूर्य में जो बली हो  उस से दशम भाव में स्थित ग्रह अपने कारकत्व के अनुसार वृत्तिकारक होता है। एक से अधिक ग्रह उस स्थान पर हों तो व्यवसाय भी एक से अधिक होंगे पर मुख्य आजीविका सबसे बलवान ग्रह की होगी। यदि दशम भाव में कोई ग्रह न हो तो दशमेश के नवांशेश  के अनुसार वृत्ति होगी। , के बल के अनुसार व्यवसाय में सफलता -असफलता व लाभ -हानि का विचार करना चाहिए।

*ग्रहों का कर्मक्षेत्र/व्यवसाय*

सूर्यादि ग्रहों का व्यवसाय एवम विभिन्न
पदार्थों  से सम्बंधित कारकत्व निम्नलिखित प्रकार से है —–

सूर्य — सरकारी सेवा ,उच्च  स्तरीय प्रशासनिक सेवा ,विदेश सेवा ,उड्डयन ,ओषधि ,चिकित्सा ,सभी प्रकार के अनाज ,लाल रंग के पदार्थ , शहद ,लकड़ी व प्लाई वुड का कार्य ,सर्राफा , वानिकी ,ऊन व ऊनी वस्त्र ,पदार्थ विज्ञान ,अन्तरिक्ष विज्ञान ,फोटोग्राफी ,नाटक ,फिल्मों का निर्देशन ,राजनीति इत्यादि |
चन्द्र — श्वेत पदार्थ ,चांदी ,जल से उत्पन्न पदार्थ , डेयरी उद्योग , कोल्ड ड्रिंक्स , मिनरल वाटर ,आइस क्रीम ,आचार -चटनी -मुरब्बे , नेवी ,जल आपूर्ति विभाग ,नहरी  एवम  सिंचाई विभाग ,नमक ,चावल ,चीनी , पुष्प सज्जा ,मशरूम ,नर्सिंग , यात्राएं ,मत्स्य से सम्बंधित क्षेत्र , सब्जियां ,लांड्री ,आयात -निर्यात ,मोती , आयुर्वेदिक औषधियां ,कथा -कविता लेखन  इत्यादि

मंगल — धातुओं से सम्बंधित कार्य क्षेत्र ,सेना ,पुलिस ,चोरी ,बिजली का कार्य ,विद्युत् विभाग ,इलेक्ट्रिक एवम इलेक्ट्रोनिक इंजिनीयर ,लाल रंग के पदार्थ ,जमीन का  क्रय -विक्रय ,बेकरी ,कैटरिंग ,हलवाई,इंटों का भट्ठा, रक्षा विभाग ,खनिज पदार्थ ,बर्तनों का कार्य , वकालत , शस्त्र निर्माण , बॉडी बिल्डिंग ,साहसिक खेल ,ब्लड बैंक ,फायर ब्रिगेड ,आतिशबाजी ,रसायन शास्त्र ,होटल एवम रेस्तरां ,फास्ट -फ़ूड , जूआ ,मिटटी के बर्तन व खिलोने , शल्य चिकित्सक इत्यादि

बुध — व्यापार ,गणित ,संचार क्षेत्र ,मुनीमी ,दलाली ,आढ़त ,हरे पदार्थ ,सब्जियां ,शेयर मार्किट ,लेखा कार ,कम्प्यूटर ,फोटोस्टेट ,मुद्रण ,ज्योतिष ,लेखन ,डाक -तार ,समाचार पात्र ,दूत कर्म ,टाइपिस्ट ,कोरियर  सेवा ,बीमा ,सैल टैक्स ,आयकर विभाग , सेल्ज मैन,गणित व कोमर्स के अध्यापक ,हास्य व्यंग के चित्रकार या कलाकार इत्यादि |

गुरु —  बैंकिंग ,न्यायालय ,पीले पदार्थ ,स्वर्ण ,शिक्षक ,पुरोहित ,शिक्षण संस्थाएं ,राजनीति ,पुस्तकालय ,सभी प्रकार के फल ,मिठाइयाँ ,मोम ,घी ,प्रकाशन ,प्रबंधन ,दीवानी वकालत ,किरयाना इत्यादि |

शुक्र — चांदी के जेवर या अन्य पदार्थ ,अगरबत्ती व धूप ,श्वेत पदार्थ , कला क्षेत्र ,अभिनय , टूरिज्म , वाहन ,दूध दही ,चावल ,शराब ,श्रृंगार के साधन ,गिफ्ट हॉउस ,चाय -कोफ़ी ,गारमेंट्स ,इत्र,,ड्रेस डिजायनिंग ,मनोरंजन के साधन ,फिल्म उद्योग ,वीडियो पार्लर ,मैरिज  ब्यूरो ,इंटीरियर डेकोरेशन ,हीरे के आभूषण ,पालतू पशुओं का व्यापार या चिकित्सक , चित्रकला तथा स्त्रियों के काम में आने वाले पदार्थ , मैरिज पैलेस एवम विवाह में काम आने वाले सभी कार्य व पदार्थ  इत्यादि |

शनि — नौकरी ,मजदूरी ,ठेकेदारी ,लोहे का कार्य ,मैकेनिकल इंजिनियर ,चमड़े का काम ,कोयला ,पेट्रोल ,प्लास्टिक एवम रबर  उद्योग ,काले पदार्थ ,स्पेयर पार्ट्स ,पत्थर एवम चिप्स ,श्रम एवम समाज कल्याण विभाग ,प्रेस , टायर उद्योग ,पलम्बर , मोटा अनाज ,कुकिंग गैस ,घड़ियों का काम ,कबाड़ी का काम ,भवन निर्माण सामग्री इत्यादि |

उपरोक्त सूत्र के अतिरिक्त दशमेश की भाव स्थिति एवम दशमांश कुंडली का विश्लेष्ण भी व्यवसाय का चुनाव करने में सहायक होता है