गुरुवार, जून 14, 2018

भगवान_की_पूजा_में_जानने_योग्य_बातें

#भगवान_की_पूजा_में_जानने_योग्य_बातें

1. #घर में #पाठ_पूजा करने वालो को एक ही #मूर्ति की पूजा नहीं करके अनेक देवी-देवताओं की पूजा करनी चाहिए । 

         घर में पंचदेव पूजन में  श्री गणेश  माँ दूर्गा ज़ी ,भगवान शिव ,भगवान विष्णु व सूर्य देव की पूजा  करना अच्छा रहता है . व आपका मुख उत्तरपूर्व दिशा की ओर तो बहुत अच्छा है ,तथा पंचोपचार पूजा क्रम हो ज्यादा अच्छा है  1.आवाहन  2.स्नान या देवताओ को जल के छीटे मारना 3.गंध तिलक लगाना.4.धूप दीपक जलाना   5.नैवेध  (भोग ) चढ़ाना चाहिए l

2. दीपक को दीपक से जलाने से दरिद्र ओर रोग होता है l

3. यज्ञ, श्राद्ध ,व्रत,अनुष्टान ,जाप आदि करते समय सत्विक रहना चाहिए ,कम बोलें व झूठ नहीं बोलना चाहिए l

4. शालिग्राम की मूर्ति जितनी छोटी हो वह ज्यादा फलदायक है।

5. कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी देव कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।

6. मंगल कार्यो में कुमकुम का तिलक प्रशस्त माना जाता हैं। पूजा में टूटे हुए अक्षत के टूकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए।

7. पानी, दूध, दही, घी आदि में अंगुली नही डालना चाहिए। इन्हें लोटा, चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती है अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं।

8. तांबे के बरतन में दूध, दही या पंचामृत आदि नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह मदिरा समान हो जाते हैं।

9. आचमन तीन बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रसन्न होते हैं। दाहिने कान का स्पर्श करने पर भी आचमन के तुल्य माना जाता है।

10.देवताओं को अंगूठे से नहीं मले। चकले पर से चंदन कभी नहीं लगावें। उसे छोटी कटोरी या बांयी हथेली पर रखकर लगावें।

11. पुष्पों को बाल्टी, लोटा, जल में डालकर फिर निकालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।

12. भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर समस्त अंगों की सात बार आरती उतारें।

13. भगवान की आरती दोनों हाथों से करनी चाहिए l

14. लोहे के पात्र से भगवान को नैवेद्य अपर्ण नहीं करें।

15. मेरूहीन माला या मेरू का लंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए। माला, रूद्राक्ष, तुलसी एवं चंदन की उत्तम मानी गई हैं। माला को अनामिका (तीसरी अंगुली) पर रखकर मध्यमा (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए।

16. जप करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें। तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए। माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए। ब्राह्मण को या द्विजाती को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए।

16. जप करते हुए जल में स्थित व्यक्ति, दौड़ते हुए, शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना वर्जित हैं। बिना नमस्कार किए आशीर्वाद देना वर्जित हैं।

17. एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए। सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए। बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।

18. जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। (मन ही मन में )इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।

19. जप करते समय दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए। जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।

20.संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषेध है ,आर्थात नहीं तोड़ना चाहिए l

21. पूजा पूर्ण होने पर अपनी क्रूटियों भूल चूक  व अपराधों के लिए क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए ,तथा दंडवत प्रणाम् करना चाहिए l.



महिलाओ के लिए विशेष

महिलाओ के लिए विशेष
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.......... [यदि बार-बार अनावश्यक डाक्टर के पास दौडने से बचना
हो तो एक नजर इधर भी ].......
यदि आप कमर दर्द ,रक्त विकार ,स्नायु विकार ,असमय बुढ़ापा
,झुर्रियो ,त्वचा के रूखापन ,मानसिक तनाव ,संतान हीनता
,गर्भाशय-योनी विकार ,मानसिक व्याधि ,भुत प्रेत भय
वायव्य बाधा ,उत्साह हीनता ,ऊर्जा की
कमी ,संवेदन हीनता ,ओज-तेज-प्रभावश
ालिता में कमी ,आदि का सामना कर रही है
तो सीधा सा अर्थ है की आप में ऋणात्मक
ऊर्जा अर्थात पृथ्वी की उर्जा अर्थात
काली की उर्जा अर्थात मूलाधार
की उर्जा की कमी हो
रही है जो आप में नैसर्गिक रूप से पाया जाता है
अधिक मात्रा में ,जो आपकी मूल प्रकृति है ,,ध्यान दे
आप प्रकृति की नैसर्गिक ऋणात्मक प्रतिकृति है
,आपका शरीर ,मानसिक संरचना ,उर्जा
प्रणाली इस प्रकार की बनी
होती है की आपमें ऋणात्मक ऊर्जा
[प्रकृति की ]अधिक होती है ,अधिक
अवशोषित होती है फलतः आपको अधिक जरुरत
भी होती है ,,ऐसा नैसर्गिक रूप से है
इसे आप चाहकर भी नहीं बदल
सकती ,|,भावनाओं की अधिकता ,कोमलता
,सौंदर्य प्रियता ,बच्चो के पोषण - उत्पत्ति की क्षमता
,मासिक अवस्था केवल आपमें ही होती
है पुरुष में नहीं ,क्योकि पुरुष धनात्मक उर्जा का
प्रतिनिधित्व करता है ,उसमे धनात्मक ऊर्जा की मात्रा
अधिक होती है आपमें ऋणात्मक की
,जिनका एक निश्चित संतुलन होता है ,संतुलन बिगड़ने से दोनों में
समस्याए उत्पन्न होती है ,,आपके समस्त गुण और
प्रतिक्रियाये -क्रियाए इन्ही पृथ्वी
तत्वीय ऊर्जा से प्रभावित होती है
,,इनकी कमी से उपरोक्त समस्याओं के
साथ ही आपकी सम्पूर्ण
कार्यप्रणाली अव्यवस्थित हो जाती है
,जिससे कमशः समस्याए उत्पन्न होने लगती है ,,अतः
आपको अपने मूल उर्जा को बनाए रखना चाहिए ,इससे आप उपरोक्त
समस्याओं से बच सकती है ,कम तो यह अवश्य
ही हो सकती है ,इससे आपको डाक्टरों
का चक्कर भी कम लगाना पड़ेगा भविष्य में ,इसके लिए
आप निम्न उपाय कर सकती है ,,
[१]अपने बाल बढाकर रखे ,उन्हें संवार कर रखे ,,बाल
वातावरणीय तरंगों के ग्रहण करता है यह तरंग
अवशोषित करते है जो संवेदन शीलता और दूसरों को
परखने की क्षमता बढाने के साथ ही
आत्मविश्वास में वृद्धि करते है ,सौंदर्य तो यह बढाते
ही है .
[२]पावों में चांदी के पायल जरुर पहने [अन्य धातु के
नहीं ],यह आपमें पृथ्वी से ऊर्जा
ग्रहण की मात्रा बढाते है ,फलतः संतुलन बनता है ,
[३]सुबह -शाम कच्ची मिटटी
की जमीन पर कुछ देर नंगे पाँव अवश्य
चले ,यह पृथ्वी से तरंगे ग्रहण करने के लिए
उपयोगी है जो अनेक रोगों ,मानसिक तनाव -विकार को दूर
करता है ,सौंदर्य -तेज-उत्साह बढता है ,यदि यह संभव
नहीं है टी काली
मिटटी घर में लाकर उसे पावो से १० मिनट
पानी डालकर आट की तरह गुथे ,यह
भी संभव नहीं है तो उस
मिटटी का पेस्ट बनाकर पावो में लगाकर सूखने दे ,फिर धो
डाले .
[४]कमर में कला धागा पहने ,यह रक्षा के साथ उर्जा संतुलन में
भी कारगर होता है ,कमर की समस्याओं
में भी लाभप्रद है .
[५]पृथ्वी अथवा काली की
उर्जा से परिपूर्ण रसायनों-वनस्पतियों का पेस्ट बनाकर मूलाधार पर
गोल टीका लगाए ,,यह संभव नहीं है तो
निम्न उपाय करे .
[६]काली माँ की पूजा करे ,साधना करे ,यह
संभव न हो तो भोजपत्र पर बना अभिमंत्रित -प्राण प्रतिष्ठित
काली यन्त्र चांदी के ताबीज में
[यन्य धातु में नहीं ]गले में धारण करे जो
किसी वास्तविक काली साधक द्वारा बनाया
और अभिमंत्रित किया गया हो ..
उपरोक्त उपाय पर ,विवरण पर यदि ध्यान दे तो आपकी
बहुत सी समस्याए कम हो जायेगी और
आपके स्वस्थ रहने -निरोगी रहने की
मात्रा बढ़ जायेगी ,उत्साह-
जीवनी उर्जा बढ़ जाने से आप
सुखी हो सकती है ,|

☺️गौमूत्र से दूर करें घर के दोष, खुश रहेंगे☺️

गौमूत्र से दूर करें घर के दोष, खुश रहेंगे…
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हिंदू धर्म में गाय को पवित्र और पूजनीय माना गया है।
शास्त्रों में गौ को माता का दर्जा दिया गया है। साथ ही गाय
की पूजा को सभी मनोकामनाएं पूर्ण करने
वाली बताया गया है। वास्तु के अनुसार गौमूत्र से घर के
सभी वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं और परेशानियां दूर
हो जाती हैं।
वैसे तो गाय की पूजा से ही हमारे कई
जन्मों के पाप स्वत: ही नष्ट हो जाते हैं लेकिन
गौमूत्र का काफी महत्व बताया गया है। शास्त्रों के
अनुसार गाय में तैतीस करोड़ देवी-देवताओं
का वास होता है इसी वजह से
गौ को पूजनीय और पवित्र माना गया है। गाय से मिलने
वाली हर चीज का धार्मिक महत्व है।
गौमूत्र को आयुर्वेद और धर्म में
काफी गुणकारी बताया गया है।
आयुर्वेद के अनुसार गौमूत्र का कई बीमारियों में दवा के रूप
में उपयोग किया जाता है। वहीं धर्म के अनुसार इससे
घर
की पवित्रता बनी रहती है।
यदि हमारे घर में किसी प्रकार का कोई वास्तु दोष
हो तो प्रतिदिन घर में गौमूत्र का छिड़कने से वे सभी दोष
दूर हो जाते हैं।

💥जानिए स्वस्तिक का लाभ, उपाय, प्रभाव और महत्त्व💥*

*💥जानिए स्वस्तिक का लाभ, उपाय, प्रभाव और महत्त्व💥*

*किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने से पहले हिन्दू धर्म में स्वास्तिक का चिन्ह बनाकर उसकी पूजा करने का महत्व है। मान्यता है कि ऐसा करने से कार्य सफल होता है। स्वास्तिक के चिन्ह को मंगल प्रतीक भी माना जाता है।*

*स्वास्तिक शब्द को ‘सु’ और ‘अस्ति’ का मिश्रण योग माना जाता है। यहां ‘सु’ का अर्थ है शुभ और ‘अस्ति’ से तात्पर्य है होना। अर्थात स्वास्तिक का मौलिक अर्थ है ‘शुभ हो’, ‘कल्याण हो’।विवाह, मुंडन, संतान के जन्म और पूजा पाठ के विशेष अवसरों पर स्वस्तिक का चिन्ह बनता है।*

*यही कारण है कि किसी भी शुभ कार्य के दौरान स्वास्तिक को पूजना अति आवश्यक माना गया है। लेकिन असल में स्वस्तिक का यह चिन्ह क्या दर्शाता है, इसके पीछे ढेरों तथ्य हैं। स्वास्तिक में चार प्रकार की रेखाएं होती हैं, जिनका आकार एक समान होता है।*

*मान्यता है कि यह रेखाएं चार दिशाओं - पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण की ओर इशारा करती हैं। लेकिन हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यह रेखाएं चार वेदों - ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद का प्रतीक हैं। कुछ यह भी मानते हैं कि यह चार रेखाएं सृष्टि के रचनाकार भगवान ब्रह्मा के चार सिरों को दर्शाती हैं।*

*इसके अलावा इन चार रेखाओं की चार पुरुषार्थ, चार आश्रम, चार लोक और चार देवों यानी कि भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश (भगवान शिव) और गणेश से तुलना की गई है। स्वास्तिक की चार रेखाओं को जोड़ने के बाद मध्य में बने बिंदु को भी विभिन्न मान्यताओं द्वारा परिभाषित किया जाता है।*

*मान्यता है कि यदि स्वास्तिक की चार रेखाओं को भगवान ब्रह्मा के चार सिरों के समान माना गया है, तो फलस्वरूप मध्य में मौजूद बिंदु भगवान विष्णु की नाभि है, जिसमें से भगवान ब्रह्मा प्रकट होते हैं। इसके अलावा यह मध्य भाग संसार के एक धुर से शुरू होने की ओर भी इशारा करता है।*

*स्वास्तिक की चार रेखाएं एक घड़ी की दिशा में चलती हैं, जो संसार के सही दिशा में चलने का प्रतीक है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार यदि स्वास्तिक के आसपास एक गोलाकार रेखा खींच दी जाए, तो यह सूर्य भगवान का चिन्ह माना जाता है। वह सूर्य देव जो समस्त संसार को अपनी ऊर्जा से रोशनी प्रदान करते हैं।हिन्दू धर्म के अलावा स्वास्तिक का और भी कई धर्मों में महत्व है।*

*बौद्ध धर्म में स्वास्तिक को अच्छे भाग्य का प्रतीक माना गया है। यह भगवान बुद्ध के पग चिन्हों को दिखाता है, इसलिए इसे इतना पवित्र माना जाता है। यही नहीं, स्वास्तिक भगवान बुद्ध के हृदय, हथेली और पैरों में भी अंकित है।*

*हिन्दू धर्म में ही स्वास्तिक के प्रयोग को सबसे उच्च माना गया है लेकिन हिन्दू धर्म से भी ऊपर यदि स्वास्तिक ने कहीं मान्यता हासिल की है तो वह है जैन धर्म। हिन्दू धर्म से कहीं ज्यादा महत्व स्वास्तिक का जैन धर्म में है।*

*जैन धर्म में यह सातवं जिन का प्रतीक है, जिसे सब तीर्थंकर सुपार्श्वनाथ के नाम से भी जानते हैं। श्वेताम्बर जैनी स्वास्तिक को अष्ट मंगल का मुख्य प्रतीक मानते हैं।*

*केवल लाल रंग से ही स्वास्तिक क्यों बनाया जाता है? भारतीय संस्कृति में लाल रंग का सर्वाधिक महत्व है और मांगलिक कार्यों में इसका प्रयोग सिन्दूर, रोली या कुमकुम के रूप में किया जाता है। लाल रंग शौर्य एवं विजय का प्रतीक है। लाल रंग प्रेम, रोमांच व साहस को भी दर्शाता है। धार्मिक महत्व के अलावा वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाल रंग को सही माना जाता है।*

*लाल रंग व्यक्ति के शारीरिक व मानसिक स्तर को शीघ्र प्रभावित करता है। यह रंग शक्तिशाली व मौलिक है। हमारे सौर मण्डल में मौजूद ग्रहों में से एक मंगल ग्रह का रंग भी लाल है। यह एक ऐसा ग्रह है जिसे साहस, पराक्रम, बल व शक्ति के लिए जाना जाता है। यह कुछ कारण हैं जो स्वास्तिक बनाते समय केवल लाल रंग के उपयोग की ही सलाह देते हैं।*

*वैज्ञानिकों ने तूफान, बरसात, जमीन के अंदर पानी, तेल के कुएँ आदि की जानकारी के लिए कई यंत्रों का निर्माण किया। इन यंत्रों से प्राप्त जानकारियाँ पूर्णतः सत्य एवं पूर्णतः असत्य नहीं होतीं। जर्मन और फ्रांस ने यंत्रों का आविष्कार किया है, जो हमें ऊर्जाओं की जानकारी देता है। उस यंत्र का नाम बोविस है। इस यंत्र से स्वस्तिक की ऊर्जाओं का अध्ययन किया जा रहा है।*

*वैज्ञानिकों ने उसकी जानकारी विश्व को देने का प्रयास किया है। विधिवत पूर्ण आकार सहित बनाए गए एक स्वस्तिक में करीब 1 लाख बोविस ऊर्जाएँ रहती हैं। जानकारियाँ बड़ी अद्भुत एवं आश्चर्यजनक है।*

*स्वस्तिक का महत्व सभी धर्मों में बताया गया है। इसे विभिन्न देशों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। चार हजार साल पहले सिंधु घाटी की सभ्यताओं में भी स्वस्तिक के निशान मिलते हैं। बौद्ध धर्म में स्वस्तिक का आकार गौतम बुद्ध के हृदय स्थल पर दिखाया गया है। मध्य एशिया देशों में स्वस्तिक का निशान मांगलिक एवं सौभाग्य सूचक माना जाता है।*

*शरीर की बाहरी शुद्धि करके शुद्ध वस्त्रों को धारण करके ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए (जिस दिन स्वस्तिक बनाएँ) पवित्र भावनाओं से नौ अंगुल का स्वस्तिक 90 डिग्री के एंगल में सभी भुजाओं को बराबर रखते हुए बनाएँ।*

*केसर से, कुमकुम से, सिन्दूर और तेल के मिश्रण से अनामिका अंगुली से ब्रह्म मुहूर्त में विधिवत बनाने पर उस घर के वातावरण में कुछ समय के लिए अच्छा परिवर्तन महसूस किया जा सकता है।भवन या फ्लैट के मुख्य द्वार पर एवं हर रूम के द्वार पर अंकित करने से सकारात्मक ऊर्जाओं का आगमन होता है भवन या फ्लैट के मुख्य द्वार पर एवं हर रूम के द्वार पर अंकित करने से सकारात्मक ऊर्जाओं का आगमन होता है।*

जमीन बेचने के लिए टोटका

जमीन बेचने के लिए टोटका

1.बुधवार के दिन एक अनार का पौधा उस भूमि या भवन में लगाए।
2. 7 शनिवार लगातार एक तेल का बड़ा दीपक भैरो जी के मंदिर मे जलाए।
3 .शनिवार को साबुत उड़द के 21 दानो पर सरसों का तेल लगाकर उस भूमि या भवन में फैंक दे।
4. आनेक्स की माला से कार्य सीधी के लिए ''ओम वक्र तुण्डाय नमः'' का 9 या 27 माला का जाप करे, कार्य सिद्ध होगा।
कष्टों को दूर करने का एक सटीक उपाय—
शास्त्रों के अनुसार सभी के कष्टों को दूर करने का एक सटीक उपाय बताया गया है - मछलियों को आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर खिलाना ।
यदि आपकी कुंडली में कोई दोष या ग्रह बाधा हो तो यह उपाय काफी कारगर सिद्ध होता है । मछलियों को खाना खिलाना बहुत शुभ कर्म माना जाता है। इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया था, इससे मछलियों का महत्व काफी अधिक बढ़ जाता है। इसके अलावा सभी देवी-देवताओं और ग्रहों की कृपा प्राप्ति के लिए भी यह श्रेष्ठ उपाय है। हमेशा खुश और शांत रहने के लिए भी यह उपाय करना चाहिए ।

गाय को घास खिलाने से कष्ट दूर होते हैं !पंछियों को दाना डालने से रोजगार अच्छा चलता है !कुत्तों को रोटी देने से दुश्मन दूर भागते है !चींटियों को आहार देने से कर्जमुक्त रहते हैं, मछलियों को आटा गोली चुगाने से समृधि होते हैं !

जब भाग्य न दे साथ, करें यह टोटका---
कभी-कभी न चाहते हुए भी जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ता है। भाग्य साथ ही नहीं देता है, बल्कि दुर्भाग्य निरन्तर पीछा करता रहता है। दुर्भाग्य से बचने के लिए या दुर्भाग्य नाश के लिए यहां एक अनुभूत टोटका बता रहे हैं। इसका बिना शंका के मन से पूर्ण आस्था के साथ करने से दुर्भाग्य का नाश होकर सौभाग्य वृद्धि होती है।
टोटका--

सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले इस टोटके को करना है। एक रोटी लें। इस रोटी को अपने ऊपर से 31 बार ऊवार लें। प्रत्येक बार वारते समय इस मन्त्र का उच्चारण भी करें।

ऊँ दुभाग्यनाशिनी दुं दुर्गाय नम:
– बाद में रोटी को कुत्ते को खिला दें अथवा बहते पानी में बहा दें।
– यह अद्भुत प्रयोग है। इसके बाद आप देखेंगे कि किस्मत के दरवाजे आपके लिए खुल गए हैं। बिना शंका के इस प्रयोग को मन से करने से शीघ्र लाभ होता है।

(2)--   कुछ लोग ऐसे होते हैं जो जितनी भी मेहनत करें लेकिन उन्हें उसका फल नहीं मिलता। वे हमेशा पैसों की तंगी में ही जीते हैं। पैसा आता भी है तो तुरंत समाप्त हो जाता है। उनके घर में बरकत नहीं होती। ऐसे लोग हमेशा यही सोचते हैं किसी तरह से भी उसके घर की बरकत आ जाए और गरीबी दूर हो जाए। यदि आपके घर में भी बरकत नहीं है तो नीचे लिखे तांत्रिक प्रयोग को करने से आपकी यह समस्या दूर हो जाएगी।
उपाय--
सात कौडिय़ां व एक लघु शंख को मसूर की दाल की ढेरी पर स्थापित कर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके आसन पर बैठ जाएं। अब मूंगे की माला से नीचे लिखे मंत्र का जप करें। पांच माला जप होने पर इस सामग्री को किसी ऐसे स्थान पर जाकर गाढ़ दें जहां कोई आता-जाता न हो। आपकी गरीबी भी वहीं दफन हो जाएगी और आपके घर में बरकत होने लगेगी।
मंत्र-                 ऊँ गं गणपतये नम:

लक्ष्मी के टोटके –
1 :- सुबह उठकर सबसे पहले घर की मालकिन अगर एक लोटा पानी घर के मुख्य द्वार पर डालती है तो घर में लक्ष्मी देवी के आने का रास्ता खुल जाता है।
2 :- अगर आप चाहते हैं कि घर में सुख-शांति बनी रहे तो हर एक अमावस के दिन घर की अच्छी तरह सफाई करके (बेकार सामान घर में न रखें) कच्ची लस्सी का छिंटा देकर 5 अगरबत्ती जलाइए।
3:- महीने में 2 बार किसी भी दिन घर में उपला जलाकर लोबान व गूगल की धूनी देने से घर में ऊपरी हवा का बचाव रहता है तथा बीमारी दूर होती है।
4 :- आपके घर में अगर अग्नि कोण में पानी की टंकी रखी हो तो घर में कर्ज व बीमारी कभी समाप्त नहीं होती है। इससे बचने के लिए इस कोने में एक लाल बल्ब जला दें, जो हर वक्त जलता रहे।
5 :- घर में पैसा रखने वाली अलमारी का मुंह उत्तर की तरफ रखें, ऐसा करने से घर में लक्ष्मी बढ़ती है।
6 :- किसी रोज संध्याकाल में गाय का कच्चा दूध मिट्टी के किसी बर्तन में भरकर बाएं हाथ से नजर लगे बच्चे के सर से सात बार उतारकर चौराहे पर रख आएं या किसी कुत्ते को पिला दें, नजर दोष दूर हो जाएगा ।
7 :- घर के किसी भी कार्य के लिए निकलते समय पहले विपरीत दिशा में 4 पग जाएं, इसके बाद कार्य पर चले जाएं, कार्य जरूर बनेगा।................

लक्ष्मी के उपाय--
1- जो व्यक्ति प्रत्येक बुधवार को 108 कमलगटटे के बीज लेकर घी के साथ एक-एक करके अग्नि में 108 आहुतियां देता है। उसके घर से दरिद्रता हमेशा के लिए चली जाती है।
2- जो पाठ के दौरान की माला अपने गले में धारण करता है उस पर लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहती है।
3- यदि रोज 108 कमल के बीजों से आहुति दें और ऐसा 21 दिन तक करें तो आने वाली कई पीढिय़ां सम्पन्न बनी रहती हैं।
4- यदि दुकान में कमल गट्टे की माला बिछा कर उसके ऊपर भगवती लक्ष्मी का चित्र स्थापित किया जाए तो व्यापार में कमी आ ही नहीं सकती। उसका व्यापार निरंतर उन्नति की ओर अग्रसर होता रहता है।
5- कमल गट्टे की माला भगवती लक्ष्मी के चित्र पर पहना कर किसी नदी या तालाब में विसर्जित करें तो उसके घर में निरंतर लक्ष्मी का आगमन बना रहता है।
लक्ष्मी सूक्त--             न क्रोधो न च मात्सर्य,न लोभो ना शुभामति: !
भवन्ति कृत पुण्यानां, भक्तानां सूक्त जापिनाम् ।।

मोर पंख से घर का वास्तु ठीक करने का उपाय---

            मोर पंख का संबंध केवल श्रीकृष्ण से नहीं, बल्कि अन्य देवी-देवताओं से भी है। शास्त्रों के अनुसार मोर के पंखों में सभी देवी-देवताओं और सभी नौ ग्रहों का वास है। सही विधि से मोर पंख को घर में स्थापित किया जाए तो वास्तु दोष दूर होते हैं और कुंडली के सभी नौ ग्रहों के दोष भी शांत होते हैं।
यहां जानिए सभी नौ ग्रहों के दोष दूर करने के लिए मोर पंख के उपाय--
    उपाय-    यदि आप कुंडली में स्थित ग्रहों के बुरे प्रभाव दूर करना चाहते हैं या आपको मंगल शनि या राहु केतु बार-बार परेशान करते हों तो मोर पंख को 21 बार मंत्र सहित पानी के छीटे दीजिए। इसके बाद मोर पंख को घर में किसी श्रेष्ठ स्थान पर स्थापित कीजिए। यहां जानिए किस ग्रह के लिए कौन सा मंत्र जपना चाहिए...
(1)-   सूर्य के लिए उपाय--
रविवार के दिन नौ मोर पंख ले कर आएं और पंख के नीचे मैरून रंग का धागा बांध लेँ। इसके बाद एक थाली में पंखों के साथ नौ सुपारियां रखें गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें।
ऊँ सूर्याय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- दो नारियल सूर्य भगवान को अर्पित करें।
(2)-   चंद्र के लिए उपाय--
सोमवार को आठ मोर पंख ले कर आएं, पंख के नीचे सफेद रंग का धागा बांध लेँ। इसके बाद एक थाली में पंखों के साथ आठ सुपारियां भी रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें।
ऊँ सोमाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- पांच पान के पत्ते चंद्रमा को अर्पित करें। बर्फी का प्रसाद चढ़ाएं ।
(3)-   मंगल के लिए उपाय--
मंगलवार को सात मोर पंख ले कर आएं, पंख के नीचे लाल रंग का धागा बांध लेँ। इसके बाद एक थाली में पंखों के साथ सात सुपारियां रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें...
ऊँ भू पुत्राय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- दो पीपल के पत्तों पर चावल रख कर मंगल देव को अर्पित करें। बूंदी का प्रसाद चढ़ाएं।
(4)-   बुध के लिए उपाय--
बुधवार को छ: मोर पंख ले कर आएं। पंख के नीचे हरे रंग का धागा बांध लेँ। एक थाली में पंखों के साथ छ: सुपारियां रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें।
ऊँ बुधाय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- जामुन बुद्ध ग्रह को अर्पित करें। केले के पत्ते पर रखकर मीठी रोटी का प्रसाद चढ़ाएं।
(5)-   गुरु के लिए उपाय--
गुरुवार को पांच मोर पंख ले कर आएं। पंख के नीचे पीले रंग का धागा बांध लेँ। एक थाली में पंखों के साथ पांच सुपारियां रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें।
ऊँ ब्रहस्पते नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- ग्यारह केले बृहस्पति देवता को अर्पित करें।                       -  बेसन का प्रसाद बना कर चढ़ाएं।
(6)-   शुक्र के लिए उपाय--
शुक्रवार को चार मोर पंख ले कर आएं। पंख के नीचे गुलाबी रंग का धागा बांध लेँ। एक थाली में पंखों के साथ चार सुपारियां रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें।
ऊँ शुक्राय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- तीन मीठे पान शुक्र देवता को अर्पित करें।                -  गुड़-चने का प्रसाद बना कर चढ़ाएं।
(7)-   शनि के लिए उपाय--
शनिवार को तीन मोर पंख ले कर आएं। पंख के नीचे काले रंग का धागा बांध लेँ। एक थाली में पंखों के साथ तीन सुपारियां रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें !
ऊँ शनैश्वराय नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- तीन मिटटी के दिये तेल सहित शनि देवता को अर्पित करें।        -  गुलाब जामुन या प्रसाद बना कर चढ़ाएं ।
(8)-   राहु के लिए उपाय--
शनिवार को सूर्य उदय से पूर्व दो मोर पंख ले कर आएं। पंख के नीचे भूरे रंग का धागा बांध लेँ। एक थाली में पंखों के साथ दो सुपारियां रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें !
ऊँ राहवे नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- चौमुखा दिया जला कर राहु को अर्पित करें।               -    कोई भी मीठा प्रसाद बना कर चढ़ाएं।
(9)-   केतु के लिए उपाय--
शनिवार को सूर्य अस्त होने के बाद एक मोर पंख ले कर आएं। पंख के नीचे स्लेटी रंग का धागा बांध लेँ। एक थाली में पंख के साथ एक सुपारी रखें। गंगाजल छिड़कते हुए 21 बार इस मंत्र का जप करें।
ऊँ केतवे नमः जाग्रय स्थापय स्वाहा:
- पानी के दो कलश भर कर राहु को अर्पित करें।        - फलों का प्रसाद चढ़ाएं।                                         घर का द्वार यदि वास्तु के विरुद्ध हो तो द्वार पर तीन मोर पंख स्थापित करें।
          सही ‪वास्तु दिलाएगा धन- समृद्धि-

लक्ष्मी प्राप्ति के लिए रखें वास्तु का ख्याल—

1-पूर्व दिशा -: यहां घर की संपत्ति और तिजोरी रखना बहुत शुभ होता है और उसमें बढ़ोतरी होती रहती है।
2- पश्चिम दिशा -: यहां धन-संपत्ति और आभूषण रखे जाएं तो साधारण ही शुभता का लाभ मिलता है परंतु घर का मुखिया अपने स्त्री-पुरुष मित्रों का सहयोग होने के बाद भी बड़ी कठिनाई के साथ धन कमा पाता है ।
3- उत्तर दिशा -: घर की इस दिशा में कैश व आभूषण जिस अलमारी में रखते हैं, वह अलमारी भवन की उत्तर दिशा के कमरे में दक्षिण की दीवार से लगाकर रखना चाहिए। इस प्रकार रखने से अलमारी उत्तर दिशा की ओर खुलेगी, उसमें रखे गए पैसे और आभूषण में हमेशा वृद्धि होती रहेगी।
4- दक्षिण दिशा -: इस दिशा में धन, सोना, चाँदी और आभूषण रखने से नुकसान तो नहीं होता परंतु बढ़ोत्तरी भी विशेष नहीं होती है।
5- ईशान कोण -: यहां पैसा, धन और आभूषण रखे जाएं तो यह दर्शाता है कि घर का मुखिया बुद्धिमान है और यदि यह उत्तर ईशान में रखे हों तो घर की एक कन्या संतान और यदि पूर्व ईशान में रखे हों तो एक पुत्र संतान बहुत बुद्धिमान और प्रसिद्ध होता है ।
6- सीढ़ियों के नीचे तिजोरी रखना शुभ नहीं होता है। सीढ़ियों या टायलेट के सामने भी तिजोरी नहीं रखना चाहिए। तिजोरी वाले कमरे में कबाड़ या मकड़ी के जाले होने से नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है।
7- घर की तिजोरी के पल्ले पर बैठी हुई लक्ष्मी जी की तस्वीर जिसमें दो हाथी सूंड उठाए नजर आते हैं, लगाना बड़ा शुभ होता है। तिजोरी वाले कमरे का रंग क्रीम या ऑफ व्हाइट रखना चाहिए।