शनिवार, अप्रैल 21, 2018

$ स्वप्न फल विचार $

✳स्वप्न फल विचार ✳

                 🍃🌼🍃🌼🍃🌼🍃🌼🍃
1- सांप दिखाई देना- धन लाभ
2- नदी देखना- सौभाग्य में वृद्धि
3- नाच-गाना देखना- अशुभ समाचार मिलने के योग
4- नीलगाय देखना- भौतिक सुखों की प्राप्ति
5- नेवला देखना- शत्रुभय से मुक्ति
6- पगड़ी देखना- मान-सम्मान में वृद्धि
7- पूजा होते हुए देखना- किसी योजना का लाभ मिलना
8- फकीर को देखना- अत्यधिक शुभ फल
9- गाय का बछड़ा देखना- कोई अच्छी घटना होना
10- वसंत ऋतु देखना- सौभाग्य में वृद्धि
11- स्वयं की बहन को देखना- परिजनों में प्रेम बढऩा
12- बिल्वपत्र देखना- धन-धान्य में वृद्धि
13- भाई को देखना- नए मित्र बनना
14- भीख मांगना- धन हानि होना
15- शहद देखना- जीवन में अनुकूलता
16- स्वयं की मृत्यु देखना- भयंकर रोग से मुक्ति
17- रुद्राक्ष देखना- शुभ समाचार मिलना
18- पैसा दिखाई- देना धन लाभ
19- स्वर्ग देखना- भौतिक सुखों में वृद्धि
20- पत्नी को देखना- दांपत्य में प्रेम बढ़ना
21- स्वस्तिक दिखाई देना- धन लाभ होना
22- हथकड़ी दिखाई देना- भविष्य में भारी संकट
23- मां सरस्वती के दर्शन- बुद्धि में वृद्धि
24- कबूतर दिखाई देना- रोग से छुटकारा
25- कोयल देखना- उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति
26- अजगर दिखाई देना- व्यापार में हानि
27- कौआ दिखाई देना- बुरी सूचना मिलना
28- छिपकली दिखाई देना- घर में चोरी होना
29- चिडिय़ा दिखाई देना- नौकरी में पदोन्नति
30- तोता दिखाई देना- सौभाग्य में वृद्धि
31- भोजन की थाली देखना- धनहानि के योग
32- इलाइची देखना- मान-सम्मान की प्राप्ति
33- खाली थाली देखना- धन प्राप्ति के योग
34- गुड़ खाते हुए देखना- अच्छा समय आने के संकेत
35- शेर दिखाई देना- शत्रुओं पर विजय
36- हाथी दिखाई देना- ऐेश्वर्य की प्राप्ति
37- कन्या को घर में आते देखना- मां लक्ष्मी की कृपा मिलना
38- सफेद बिल्ली देखना- धन की हानि
39- दूध देती भैंस देखना- उत्तम अन्न लाभ के योग
40- चोंच वाला पक्षी देखना- व्यवसाय में लाभ
41- स्वयं को दिवालिया घोषित करना- व्यवसाय चौपट होना
42- चिडिय़ा को रोते देखता- धन-संपत्ति नष्ट होना
43- चावल देखना- किसी से शत्रुता समाप्त होना
44- चांदी देखना- धन लाभ होना
45- दलदल देखना- चिंताएं बढऩा
46- कैंची देखना- घर में कलह होना
47- सुपारी देखना- रोग से मुक्ति
48- लाठी देखना- यश बढऩा
49- खाली बैलगाड़ी देखना- नुकसान होना
50- खेत में पके गेहूं देखना- धन लाभ होना
51- किसी रिश्तेदार को देखना- उत्तम समय की शुरुआत
52- तारामंडल देखना- सौभाग्य की वृद्धि
53- ताश देखना- समस्या में वृद्धि
54- तीर दिखाई- देना लक्ष्य की ओर बढऩा
55- सूखी घास देखना- जीवन में समस्या
56- भगवान शिव को देखना- विपत्तियों का नाश
57- त्रिशूल देखना- शत्रुओं से मुक्ति
58- दंपत्ति को देखना- दांपत्य जीवन में अनुकूलता
59- शत्रु देखना- उत्तम धनलाभ
60- दूध देखना- आर्थिक उन्नति
61- धनवान व्यक्ति देखना- धन प्राप्ति के योग
62- दियासलाई जलाना- धन की प्राप्ति
63- सूखा जंगल देखना- परेशानी होना
64- मुर्दा देखना- बीमारी दूर होना
65- आभूषण देखना- कोई कार्य पूर्ण होना
66- जामुन खाना- कोई समस्या दूर होना
67- जुआ खेलना- व्यापार में लाभ
68- धन उधार देना- अत्यधिक धन की प्राप्ति
69- चंद्रमा देखना- सम्मान मिलना
70- चील देखना- शत्रुओं से हानि
71- फल-फूल खाना- धन लाभ होना
72- सोना मिलना- धन हानि होना
73- शरीर का कोई अंग कटा हुआ देखना- किसी परिजन की मृत्यु के योग
74- कौआ देखना- किसी की मृत्यु का समाचार मिलना
75- धुआं देखना- व्यापार में हानि
76- चश्मा लगाना- ज्ञान में बढ़ोत्तरी
77- भूकंप देखना- संतान को कष्ट
78- रोटी खाना- धन लाभ और राजयोग
79- पेड़ से गिरता हुआ देखना किसी रोग से मृत्यु होना
80- श्मशान में शराब पीना- शीघ्र मृत्यु होना
81- रुई देखना- निरोग होने के योग
82- कुत्ता देखना- पुराने मित्र से मिलन
83- सफेद फूल देखना- किसी समस्या से छुटकारा
84- उल्लू देखना- धन हानि होना
85- सफेद सांप काटना- धन प्राप्ति
86- लाल फूल देखना- भाग्य चमकना
87- नदी का पानी पीना- सरकार से लाभ
88- धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना- यश में वृद्धि व पदोन्नति
89- कोयला देखना- व्यर्थ विवाद में फंसना
90- जमीन पर बिस्तर लगाना- दीर्घायु और सुख में वृद्धि
91- घर बनाना- प्रसिद्धि मिलना
92- घोड़ा देखना- संकट दूर होना
93- घास का मैदान देखना- धन लाभ के योग
94- दीवार में कील ठोकना- किसी बुजुर्ग व्यक्ति से लाभ
95- दीवार देखना- सम्मान बढऩा
96- बाजार देखना- दरिद्रता दूर होना
97- मृत व्यक्ति को पुकारना- विपत्ति एवं दुख मिलना
98- मृत व्यक्ति से बात करना- मनचाही इच्छा पूरी होना
99- मोती देखना- पुत्री प्राप्ति
100- लोमड़ी देखना- किसी घनिष्ट व्यक्ति से धोखा मिलना
101- गुरु दिखाई देना- सफलता मिलना
102- गोबर देखना- पशुओं के व्यापार में लाभ
103- देवी के दर्शन करना- रोग से मुक्ति
104- चाबुक दिखाई देना- झगड़ा होना
105- चुनरी दिखाई देना- सौभाग्य की प्राप्ति
106- छुरी दिखना- संकट से मुक्ति
107- बालक दिखाई देना- संतान की वृद्धि
108- बाढ़ देखना- व्यापार में हानि
109- जाल देखना- मुकद्में में हानि
110- जेब काटना- व्यापार में घाटा
111- चेक लिखकर देना- विरासत में धन मिलना
112- कुएं में पानी देखना- धन लाभ
113- आकाश देखना- पुत्र प्राप्ति
114- अस्त्र-शस्त्र देखना- मुकद्में में हार
115- इंद्रधनुष देखना- उत्तम स्वास्थ्य
116- कब्रिस्तान देखना- समाज में प्रतिष्ठा
117- कमल का फूल देखना- रोग से छुटकारा
118- सुंदर स्त्री देखना- प्रेम में सफलता
119- चूड़ी देखना- सौभाग्य में वृद्धि
120- कुआं देखना- सम्मान बढऩा
121- अनार देखना- धन प्राप्ति के योग
122- गड़ा धन दिखाना- अचानक धन लाभ
123- सूखा अन्न खाना- परेशानी बढऩा
124- अर्थी देखना- बीमारी से छुटकारा
125- झरना देखना- दु:खों का अंत होना
126- बिजली गिरना- संकट में फंसना
127- चादर देखना- बदनामी के योग
128- जलता हुआ दीया देखना- आयु में वृद्धि
129- धूप देखना- पदोन्नति और धनलाभ
130- रत्न देखना- व्यय एवं दु:ख 131- चंदन देखना- शुभ समाचार मिलना
132- जटाधारी साधु देखना- अच्छे समय की शुरुआत
133- स्वयं की मां को देखना- सम्मान की प्राप्ति
134- फूलमाला दिखाई देना- निंदा होना
135- जुगनू देखना- बुरे समय की शुरुआत
136- टिड्डी दल देखना- व्यापार में हानि
137- डाकघर देखना- व्यापार में उन्नति
138- डॉक्टर को देखना- स्वास्थ्य संबंधी समस्या
139- ढोल दिखाई देना- किसी दुर्घटना की आशंका
140- मंदिर देखना- धार्मिक कार्य में सहयोग करना
141- तपस्वी दिखाई- देना दान करना
142- तर्पण करते हुए देखना- परिवार में किसी बुर्जुग की मृत्यु
143- डाकिया देखना- दूर के रिश्तेदार से मिलना
144- तमाचा मारना- शत्रु पर विजय
145- उत्सव मनाते हुए देखना- शोक होना
146- दवात दिखाई देना- धन आगमन
147- नक्शा देखना- किसी योजना में सफलता
148- नमक देखना- स्वास्थ्य में लाभ
149- कोर्ट-कचहरी देखना- विवाद में पडऩा
150- पगडंडी देखना- समस्याओं का निराकरण
151- सीना या आंख खुजाना- धन लाभ

*....... ‼ॐ‼........*

गुरुवार, अप्रैल 19, 2018

कुंडली में मंगल के शुभ अशुभ योग एवं उपाय

*💥कुंडली में मंगल के शुभ अशुभ योग एवं उपाय💥*

*कुंडली में मंगल की अच्छी दशा बेहद कामयाब बनाती है. वहीं इस ग्रह की बुरी दशा इंसान से सब कुछ छीन भी सकती है. मंगल के बहुत से शुभ और अशुभ योग हैं.*

*मंगल का पहला अशुभ योग -*

*किसी कुंडली में मंगल और राहु एक साथ हों तो अंगारक योग बनता है.*

*अक्सर यह योग बड़ी दुर्घटना का कारण बनता है.*

*इसके चलते लोगों को सर्जरी और रक्त से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है.*

*अंगारक योग इंसान का स्वभाव बहुत क्रूर और नकारात्मक बना देता है.*

*इस योग की वजह से परिवार के साथ रिश्ते बिगड़ने लगते हैं.*

*अंगारक योग से बचने के उपाय -*

*अंगारक योग के चलते मंगलवार का व्रत करना शुभ होगा.*

*मंगलवार का व्रत रखने के साथ भगवान शिव के पुत्र कुमार कार्तिकेय की उपासना करें.*

*मंगल का दूसरा अशुभ योग -*

*अंगारक योग के बाद मंगल का दूसरा अशुभ योग है मंगल दोष. यह इंसान के व्यक्तित्व और रिश्तों को नाजुक बना देता है.*

*कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें स्थान में मंगल हो तो मंगलदोष का योग बनता है.*

*इस योग में जन्म लेने वाले व्यक्ति को मांगलिक कहते हैं.*

*कुंडली की यह स्थिति विवाह संबंधों के लिए बहुत संवेदनशील मानी जाती है.*

*मंगलदोष के लिए उपाय -*

*हनुमान जी को रोज चोला चढ़ाने से मंगल दोष से राहत मिल सकती है.*

*मंगल दोष से पीड़ित व्यक्ति को जमीन पर ही सोना चाहिए.*

*मंगल का तीसरा अशुभ योग -*

*नीचस्थ मंगल तीसरा सबसे अशुभ योग है. जिनकी कुंडली में यह योग बनता है, उन्हें अजीब परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है.*

*इस योग में कर्क राशि में मंगल नीच का यानी कमजोर हो जाता है.*

*जिनकी कुंडली में नीचस्थ मंगल योग होता है, उनमें आत्मविश्वास और साहस की कमी होती है.*

*यह योग खून की कमी का भी कारण बनता है.*

*कभी–कभी कर्क राशि का नीचस्थ मंगल इंसान को डॉक्टर या सर्जन भी बना देता है.*

*नीचस्थ मंगल के लिए उपाय -*

*नीचस्थ मंगल के अशुभ योग से बचने के लिए तांबा पहनना शुभ सकता है.*

*इस योग में गुड़ और काली मिर्च खाने से विशेष लाभ होगा.*

*मंगल का चौथा अशुभ योग -*

*मंगल का एक और अशुभ योग है जो बहुत खतरनाक है. इसे शनि मंगल (अग्नि योग) कहा जाता है. इसके कारण इंसान की जिंदगी में बड़ी और जानलेवा घटनाओं का योग बनता है.*

*ज्योतिष में शनि को हवा और मंगल को आग माना जाता है.*

*जिनकी कुंडली में शनि मंगल (अग्नि योग) होता है उन्हें हथियार, हवाई हादसों और बड़ी दुर्घटनाओं से सावधान रहना चाहिए.*

*हालांकि यह योग कभी–कभी बड़ी कामयाबी भी दिलाता है.*

*शनि मंगल (अग्नि योग) के लिए उपाय -*

*शनि मंगल (अग्नि योग) दोष के प्रभाव को कम करने के लिए रोज सुबह माता-पिता के पैर छुएं.*

*हर मंगलवार और शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करने से इस योग का प्रभाव कम होगा.*

*मंगल का पहला शुभ योग -*

*मंगल के शुभ योग में भाग्य चमक उठता है. लक्ष्मी योग मंगल का पहला शुभ योग है.*

*चंद्रमा और मंगल के संयोग से लक्ष्मी योग बनता है.*

*यह योग इंसान को धनवान बनाता है.*

*जिनकी कुंडली में लक्ष्मी योग है, उन्हें नियमित दान करना चाहिए.*

*मंगल का दूसरा शुभ योग -*

*मंगल से बनने वाले पंच-महापुरुष योग को रूचक योग कहते हैं.*

*जब मंगल मजबूत स्थिति के साथ मेष, वृश्चिक या मकर राशि में हो तो रूचक योग बनता है.*

*यह योग इंसान को राजा, भू-स्वामी, सेनाध्यक्ष और प्रशासक जैसे बड़े पद दिलाता है.*

*इस योग वाले व्यक्ति को कमजोर और गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए.*

रास्ते पर पड़े नींबू मिर्च पर नहीं रखना चाहिए पैर, क्यों?

रास्ते पर पड़े नींबू मिर्च पर नहीं रखना चाहिए पैर,
क्यों?

नींबू, तरबूज, सफेद कद्दू और मिर्च का तंत्र और टोटकों में विशेष तौर पर उपयोग किया जाता है। नींबू का उपयोग अमूमन बुरी नजर से संबंधित मामलों में ही किया जाता है। इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण है इसका स्वाद। नींबू खट्टा और मिर्च तीखी होती है, दोनों का यह गुण व्यक्ति की एकाग्रता और ध्यान को तोड़ने में सहायक हैं।

अक्सर लोग अपने घर, ऑफिस या दुकान को बुरी नजर से बचाने के लिए नींबू-मिर्च बांधते है। जब वह खराब हो जाती है तो उसे सड़क पर फेंक देते हैं।

आप ने अधिकतर बड़े बुजुर्गो को कहते हुए सुना होगा कि सड़क पर यदि नींबू मिर्च पड़े हों तो उस पर पैर नही रखना चाहिए। इसके पीछे कोई अंधविश्वास नहीं है। इसका एक बहुत बड़ा कारण है।

जब कोई भी बुरी नजर से बचने के लिए नींबू मिर्च बांधता है तो उस घर या व्यापार स्थल की तरफ जो भी नकारात्मक सोच के साथ उस दुकान की तरफ देखता है तो वह नकारात्मक उर्जा उस नींबू के द्वारा ग्रहण कर ली जाती है।

जब उस नींबू मिर्च को उस स्थान से हटाकर सड़क पर फेंका ही इसलिए जाता है ताकि लोगों के पैर उस पर पड़े।

इससे उस व्यक्ति का तो फायदा होता है क्योंकि जितना ज्यादा वो नींबू मिर्च कुचले जाते है उतना ही नकारात्मक सोच व बुरी नजर का प्रभाव कम होता है, और उसकी दुकान या व्यापारिक स्थल पर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है ।

लेकिन जो लोग उस पर पैर रखते है उस नकारात्मक ऊर्जा या बुरी नजर का प्रभाव उनके जीवन पर पडऩे लगता है और उनकी तरक्की व अच्छे कार्यो में बाधा आने लगती है, क्योंकि व नकारात्मक उर्जा जीवन को प्रभावित करती है। इसलिए सड़क पर पड़े नींबू मिर्च पर पैर रखने से बचना चाहिए।

जल्दी कर्ज मुक्ति के उपाय

इस तरह क़र्ज़ जल्दी अदा हो जाएगा
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क़र्ज़ मानव जीवन के लिए अभिशाप है। जिस व्यक्ति
पर क़र्ज़ है वो व्यक्ति जिन्दा रहते हुए भी चलती -
फिरती लाश के समान है ध्यान रखें-
1 मंगलवार को कभी क़र्ज़ न लें।
2 बुधवार को क़र्ज़ न दें।
3 व्यवसाय, मकान बनवाने हेतु क़र्ज़ जन्मकुंडली की
विवेचना करवाने के पश्चात लें।
4 प्रत्येक मंगलवार " ऋण मोचक मंगल स्तोत्र " का
पाठ अवश्य करें।
5 प्रतिदिन " श्री सूक्त " का पाठ " स्फटिक श्री
यंत्र " के सामने करने से लक्ष्मी का आगमन होता है।
6 अगर आप क़र्ज़ की प्रथम किश्त " शुक्ल पक्ष " के
प्रथम मंगलवार से प्रारंभ करते है तो शीघ्र आप ऋण से
मुक्त हो जायेगे।
7 सुबह उठते ही सबसे पहले एक मुट्ठी चावल पंक्षियों
को चुगने के लिए डालिए।
8 घर का सारा कबाड़ अमावस्या या शनिवार को
घर से बाहर करिए।
9 घर में कभी कोई भी मेहमान या अचानक कोई भी
आए कुछ न कुछ अवश्य खिलाएं नहीं तो पानी तो
अवश्य ही पिलाएं।
10 5 मंगलवार हनुमान जी के मंदिर में 5 - 5 पीस मीठे
देसी घी के रोट का भोग लगाए।
11 शराब,मांस,नशे की चीजों से दूर रहें।
कर्ज से मुक्ति चाहिए तो रखें इन बातों का ध्यान
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कर्ज लेना किसी को अच्छा नहीं लगता लेकिन हर
व्यक्ति की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं
होती कि वह एक साथ रुपए खर्च कर सके इसीलिए
बरसों से हमारे यहां कर्ज लेने की प्रथा रही है। जो
लोग सक्षम हैं उनसे कर्ज लेने अब पुरानी बात हो गई।
आजकल बैंक के माध्यम से यह काम बखूबी हो जाता
है। लेकिन बैंक भी वसूली करती है यानी कर्ज तो
चुकाना पड़ता ही है।
कई बार कर्ज लेने के बाद उसे लौटाना व्यक्ति को
भारी पड़ता है और उसकी पूरी जिंदगी कर्ज चुकाते-
चुकाते खत्म हो जाती है। पेश है शास्त्रों और पुरानी
मान्यताओं के अनुसार कर्ज लेने व देने संबंधी कुछ
आसान से टिप्स। इन पर अमल करने पर आपका कर्ज,
ऋण या उधार तेजी से सिर से उतर जाएगा।
1. किसी भी महीने की कृष्ण पक्ष की 1 तिथि,
शुक्ल पक्ष की 2, 3, 4, 6, 7, 8, 10, 11, 12, 13
पूर्णिमा व मंगलवार के दिन उधार दें और बुधवार को
कर्ज लें।
2. चर लग्न जैसे- मेष, कर्क, तुला व मकर में कर्ज लेने पर
शीघ्र उतर जाता है। लेकिन, चर लग्न में कर्जा दें नहीं।
चर लग्न में पांचवें व नौवें स्थान में शुभ ग्रह व आठवें
स्थान में कोई भी ग्रह नहीं हो, वरना ऋण पर ऋण
चढ़ता चला जाएगा।
3. प्रतिदिन लाल मसूर की दाल का दान करें।
4. हस्त नक्षत्र रविवार की संक्रांति के वृद्धि योग
में कर्ज उतारने से शीघ्र ही ऋण मुक्ति मिलती है।
5. कर्ज लेने जाते समय घर से निकलते वक्त जो स्वर चल
रहा हो, उस समय वही पांव बाहर निकालें तो कार्य
सिद्धि होती है, परंतु कर्ज देते समय सूर्य स्वर को
शुभकारी माना है।
6. वास्तुदोष नाशक हरे रंग के गणपति मुख्य द्वार पर
आगे-पीछे लगाएं।
7. वास्तु अनुसार ईशान कोण को स्वच्छ व साफ रखें।
8. हनुमानजी के चरणों में मंगलवार व शनिवार के दिन
तेल-सिंदूर चढ़ाएं और माथे पर सिंदूर का तिलक
लगाएं। हनुमान चालीसा या बजरंगबाण का पाठ
करें।
9. ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का शुक्ल पक्ष के बुधवार से
नित्य पाठ करें।
10. बुधवार को सवा पाव मूंग उबालकर घी-शक्कर
मिलाकर गाय को खिलाने से शीघ्र कर्ज से मुक्ति
मिलती है।
11. सरसों का तेल मिट्टी के दीये में भरकर, फिर
मिट्टी के दीये का ढक्कन लगाकर किसी नदी या
तालाब के किनारे शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय
जमीन में गाड़ देने से कर्ज मुक्त हो सकते हैं।
12. घर की चौखट पर अभिमंत्रित काले घोड़े की
नाल शनिवार के दिन लगाएं।
13. श्मशान के कुएं का जल लाकर किसी पीपल के
वृक्ष पर चढ़ाना चाहिए। यह कार्य नियमित रूप से 7
शनिवार को किया जाना चाहिए।
14. 5 गुलाब के फूल, 1 चांदी का पत्ता, थोडे से
चावल, गुड लें। किसी सफेद कपड़े में 21 बार गायत्री
मंत्र का जप करते हुए बांध कर जल में प्रवाहित कर दें।
ऐसा 7 सोमवार तक करें।
15. ताम्रपत्र पर कर्जनाशक मंगल यंत्र (भौम यंत्र)
अभिमंत्रित करके पूजा करें या सवा चार रत्ती का
मूंगायुक्त कर्ज मुक्ति मंगल यंत्र अभिमंत्रित करके गले में
धारण करें।
16. सिद्ध-कुंजिका-स्तोत्र का नित्य एकादश पाठ
करें।
17. कर्ज मुक्ति के लिए ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का
पाठ करें एवं लिए हुए कर्ज की प्रथम किश्त मंगलवार
से देना शुरू करें। इससे कर्ज शीघ्र उतर जाता है।

आपके इष्ट देव कौन हैं?

आपके इष्ट देव कौन हैं?
शास्त्रों की मान्यतानुसार अपने इष्ट देव
की आराधना करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते
हैं। आपके आराघ्य इष्ट देव कौन से होंगे इसे आप
अपनी जन्म तारीख, जन्मदिन, बोलते
नाम की राशि या अपनी जन्म
कुंडली की लग्न राशि के अनुसार जान
सकते हैं।
जन्म माह : जिन्हें केवल जन्म का माह ज्ञात है, उनके लिए
इष्ट देव इस प्रकार होंगे-
-जिनका जन्म जनवरी या नवंबर माह में हुआ
हो वे शिव या गणेश की पूजा करें।
-फरवरी में जन्मे शिव की उपासना करें।
-मार्च व दिसंबर में जन्मे व्यक्ति विष्णु
की साधना करें।
-अप्रेल, सितंबर, अक्टूबर में जन्मे
व्यक्ति गणेशजी की पूजा करें।
-मई व जून माह में जन्मे
व्यक्ति मां भगवती की पूजा करें।
-जुलाई माह में जन्मे व्यक्ति विष्णु व गणेश का घ्यान करें।
जन्म वार से : जिनको वार का पता हो, परंतु समय का पता न हो,
तो वार के अनुसार इष्ट देव इस प्रकार होंगे-
रविवार- विष्णु।
सोमवार- शिवजी।
मंगलवार- हनुमानजी
बुधवार- गणेशजी।
गुरूवार- शिवजी
शुक्रवार- देवी।
शनिवार- भैरवजी।
राशि के आधार पर : पंचम स्थान में स्थित राशि के आधार पर
आपके इष्ट देव इस प्रकार होंगे-
मेष: सूर्य या विष्णुजी की आराधना करें।
वृष: गणेशजी।
मिथुन: सरस्वती, तारा, लक्ष्मी।
कर्क: हनुमानजी।
सिंह: शिवजी।
कन्या: भैरव, हनुमानजी, काली।
तुला: भैरव, हनुमानजी, काली।
वृश्चिक: शिवजी।
धनु: हनुमानजी।
मकर: सरस्वती, तारा, लक्ष्मी।
कुंभ: गणेशजी।
मीन: दुर्गा, राधा, सीता या कोई
देवी।
जन्म कुंडली से : जिनको जन्म समय ज्ञात
हो उनके लिए जन्म कुंडली के पंचम स्थान से पूर्व
जन्म के संचित कर्म, ज्ञान, बुद्धि, शिक्षा, धर्म व इष्ट का बोध
होता है। अरूण संहिता के अनुसार व्यक्ति के पूर्व जन्म में
किए गए कर्म के आधार पर ग्रह या देवता भाव विशेष में स्थित
होकर अपना शुभाशुभ फल देते हैं।
ग्रह के आधार पर इष्ट: पंचम स्थान में स्थित ग्रहों या ग्रह
की दृष्टि के आधार पर आपके इष्ट देव।
सूर्य: विष्णु।
चंद्रमा- राधा, पार्वती, शिव, दुर्गा।
मंगल- हनुमानजी, कार्तिकेय।
बुध- गणेश, विष्णु।
गुरू- शिव।
शुक्र- लक्ष्मी, तारा,
सरस्वती।
शनि- भैरव, काली।