शनिवार, मई 05, 2018

तुलसी का पौधा लगाने के फायदे

एक गमले में एक पौधा तुलसी का तथा एक पौधा काले धतूरे का लगायें। इन दोनों पौधों पर प्रतिदिन स्नान आदि से निवृत होकर शुद्ध जल में थोड़ा सा कच्चा दूध मिलाकर अर्पित करें।  ऐसा करने से व्यक्ति को  ब्रहमा, विष्णु, महेश, इन तीनों की संयुक्त पूजा फल मिलता है।  क्योंकि तुलसी विष्णु प्रिया है,  काला धतूरा शिव रूप है एंव तुलसी की जड़ो में भगवान ब्रहमा का निवास स्थान माना गया है।

👉जो जातक रविवार, संक्रांति, ग्रहण को छोड़कर नित्य "ॐ तुलस्यै नमः॥" मन्त्र का जाप करते हुए सुबह तुलसी पर जल चढ़ाता है, एवं सांय को दीपक जलाता है उसे जीवन के सभी सुखो की प्राप्ति होती है, उसके पाप नष्ट होते है, पुरखो को स्वर्ग में स्थान मिलता है, सन्तान संस्कारी, आज्ञाकारी होती है, उसके घर से सभी संकट कोसो दूर रहते है ।

👉 तुलसी के पत्ते बहुत ही पवित्र माने जाते है । यह हमारे जल एवं भोजन को शुद्ध और पवित्र करते हैं। इसीलिए किसी भी सूर्य या चंद्र ग्रहण के समयजल एवं  भोजन में तुलसी के पत्ते डालें जाते हैं।
👉हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार इंसान की मृत्यु के बाद उस शव के मुख में तुलसी के पत्ते डाले जाते हैं। मान्यता है कि इससे मृतक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
👉 अगर आपको लगता है कि लाख प्रयास के बाद भी आपका व्यापार उन्नति नहीं कर पा रहा है तो आप किसी भी गुरुवार को श्यामा तुलसी के चारो ओर उग आई खर पतवार को किसी पीले वस्त्र में बांधकर अपने व्यापार स्थल में किसी साफ जगह रख दें, व्यापार में गति आ जाएगी ।
👉 किसी भी शुभ मुहूर्त में तुलसी की जड़  लाएं । रविवार या गुरुवार को जब पुष्य नक्षत्र हो तो उस दिन उस जड़ को गंगा जल से धोकर, धूप दीप दिखाकर, तिलक लगाकर पूजा करके पीले कपड़े में लपेटकर अपने दाहिने हाथ में बांध लें इस आसान उपाय से व्यक्ति का तेज बढ़ता है, कार्यों में सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है, अधिकारी वर्ग प्रसन्न रहता है।   

👉अगर किसी व्यक्ति की संतान बहुत ज्यादा जिद्दी हो, बड़ो का कहना ना मानती हो तो उसे घर के पूर्व दिशा में रखे तुलसी के पौधे के तीन पत्ते रविवार को छोड़कर प्रतिदिन किसी भी तरह अवश्य ही खिलाएं, सन्तान का व्यवहार सुधरने लगेगा ।
ऐसी भी मान्यता है कि यदि पूर्व दिशा में खिड़की के पास तुलसी का पौधा रखा जाए तो भी संतान आज्ञाकारी होती है।

👉यह भी माना जाता है कि यदि आपकी कन्या का विवाह नहीं हो रहा हो तो कन्या तुलसी के पौधे को घर के दक्षिण-पूर्व में रखकर उसे नियमित रूप से जल अर्पण करें। इससे भी शीघ्र ही योग्य वर की प्राप्ति होती है ।

👉 तुलसी का पौधा किचन के पास रखने से घर के सदस्यों में आपसी प्रेम, सामंजस्य बना रहता है।

👉नवीन गृह में तुलसी का पौधा, देवता का चित्र, गौमूत्र, गंगाजल, और पानी का कलश लेकर घर के अंदर प्रवेश करना चाहिए । इससे घर में सदैव सुख शांति, प्रसन्नता का वातावरण बना रहता है, घर में धन की कभी भी कमी नहीं रहती है।

om घर से निकलने से पूर्व तुलसी के दर्शन करना बहुत ही शुभ एवं सफलता की निशानी माना जाता है।

👉प्रतिदिन दही के साथ चीनी और तुलसी के पत्तों का सेवन करना बहुत ही शुभ माना गया है। तुलसी के पत्तों का घर से निकलते समय सेवन करने से कार्यों में कोई भी संकट नहीं आते है । 

om हिन्दु धर्मशास्त्रों में तुलसी के आठ नाम बताए गए हैं- वृंदा, वृंदावनि, विश्व पूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, तुलसी और कृष्ण जीवनी। सुबह तुलसी में जल चढ़ाते समय इनका नित्य नाम लेने जातक को जीवन में कोई भी संकट कोई आभाव नहीं रहता है । उसे सभी तरह के भौतिक सुख सुविधाओं की प्राप्ति होती है ।

👉 तुलसी का पत्तों के नित्य सेवन करना बहुत ही पुण्यदायक लाभदायक माना जाता है। लेकिन ध्यान रहे कि उसे दाँतों के बीच चबाना नहीं चाहिए।

शुक्रवार, मई 04, 2018

ग्रहों को प्रसन्न करने के खास उपाय।

ग्रहों को प्रसन्न करने के खास उपाय।

1. आचार्य वराहमिहिर के अनुसार जब सूर्य जन्म कुंडली की बुरी स्थिति में पड़ा हो और हानिकारक हो रहा हो, जैसे दिल की बीमारी, शासकीय कार्यों में परेशानी, आंखों में कष्ट हो, पेट संबंधी बीमारियां हो, हड्डियों में तकलीफ होती है, उस समय गुड़ का दान करना, गेहूं का दान, लाल रंग की वस्तुओं का दान, तांबे का दान एवं यज्ञ और हवन करना लाभप्रद, शुभ होगा। संकट कम होंगे। रात्रि के समय आग को दूध से बुझाने से अग्निरूपी सूर्य को उसके मित्र दूधरूपी चंद्रमा की सहायता प्राप्त होगी तथा अनिष्ट ग्रह की शांति में सहयोग मिलेगा।

2. यदि चंद्रमा के कारण कष्ट हो रहा है, माता बीमार है, मानसिक चिंता, मानसिक निर्बलता हो, फेफड़ों में रोग हो अथवा धन का नाश हो रहा है, तो चांदी को बहते पानी में बहा देने से चंद्र संबंधित कष्टों का निवारण करने वाला होगा।

3. रात में थोड़ा दूध और थोड़ा पानी एक ही बर्तन में रखकर सिरहाने रखकर सो जाएं एवं प्रात: पीपल के वृक्ष में डाल दें। चंद्र से संबंधित वस्तुएं जैसे पानी, दूध, चांदी अपने से पृथक करें अर्थात किसी को भी दान कर दें। शिवजी को इस ग्रह से संबंधित माना गया है। शिव मे मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है अत: भगवान शिव का दूधमिश्रित जल से पूजन करें तथा रात्रि में दूध नहीं पीएं।

4. यदि मंगल के कारण कष्ट है तो मीठी रोटी (गुड़ की) बनाकर दान करें। रेवड़ी और बताशे पानी में बहाएं तथा हनुमान ही को चोला चढ़ाएं, झंडा चढ़ाएं।

5. बुध ग्रह के कारण परेशानी हो रही है, तब कौड़ियों को जलाकर उस राख को उसी दिन नदी में बहाएं। तांबे के सिक्के में छेद करके (छिद्र) नदी में या बहते पानी में डालें। साबुत मूंग, पन्ना आदि दान करें। फिटकरी पीसकर उससे मंजन करें, ग्रह निवारण होगा।

6. जब गुरु अनिष्टकारी हो तो घर के हर सदस्य से एक-एक मुद्रा इकट्ठा कर मंदिर में गुप्त दान नियमित रूप से करें। गुड़, हल्दी, आटे में मिलाकर ब्रहस्पतिवार के दिन गाय को खिलाएं। चने की दाल, केशर, सोना आदि दान करें। लड्डूगोपाल की पूजा करें।

7.  यदि शुक्र अनिष्टकारी हो तो पशुओं को चारा खिलाएं, गौदान करें। घी, कपूर, सफेद मोती, दही का दान करें। गाय को अपने भोजन से निकालकर खाना दें, तब ही स्वयं भोजन करें।

8. शनि के अनिष्ट फल दूर करने के लिए तेल में अपनी छाया को देखकर तेल दान करें। काली उड़द, लोहा, तेल से बनी वस्तु (खाद्य पदार्थ), चमड़ा, पत्थर, शराब, स्प्रिट आदि का दान करें। कौओं को अपने खाने में से कुछ भा‍ग खिलाएं। काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ खिलाएं। चींटियों को काले तिल में गुड़ मिलाकर डालें।

9. यदि राहु के कारण अनिष्टकारी स्थिति बन रही है तो नारियल को नदी में बहाएं। मूली का दान करें। कोयला नदी में बहाएं। सफाई कर्मचारी को रुपए, कपड़े व अनाज का दान करें।

10. जन्म पत्रिका में केतु अनिष्टकारी हो तो कुत्ते को भरपेट भोजन करवाएं। केतु की दशा में पुत्र का व्यवहार बदल जाता है अत: मंदिर में अन्न, वस्त्र, कम्बल आदि का दान करें।

11. आर्थिक स्‍थिति सुदृढ़ करने के लिए, गृह क्लेश शांत करने हेतु पंढेरी (जहां पीने का पानी रखा जाता है) पर प्रतिदिन शाम को शुद्ध घी का दीपक रखकर ईश्वरीय एवं पितरों से अज्ञानतावाश हुए अपराधों के लिए क्षमा-प्रार्थना करें।

12.प्रतिदिन गणपति को लाजा (खील) चढ़ाने से भी रोजगार में वृद्धि होती है। प्रतिदिन सूर्योदय के समय अर्घ्य देने से शीघ्र भाग्योदय होता है। प्रतिदिन गणेशजी को दूर्बा अर्पित करने से शीघ्र भाग्योदय होता है। प्रतिदिन एक माह तक सप्तधान्य का चूरा और गुड़ मिलाकर काली चींटियों को डालना क्लेश मुक्तिकारक होता है।

*हनुमान जी की ध्वजा लगाकर करें वास्तु दोष का समाधान "-*

*हनुमान जी की ध्वजा लगाकर करें वास्तु दोष का समाधान "-*

आइये हम आपको बताते हैं वास्तु शास्त्र के कुछ अहम टिप्स जिसे अपनाकर आप इन सभी समस्यों से निजात पा सकते :-

पंडित भरतलाल शास्त्री ज्योतिषाचार्य,जयपुर घर की बनावट, उसकी दिशा, घर के सामान, पेड़ पौधे बताते हैं कि घर किस ग्रह के प्रभाव में है। सामान्यत: इन बातों को ध्यान में रख कर नया भूखंड खरीदना या बनवाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार एेसा नहीं करने पर लोगों को तमाम तरह की परेशनियों का सामना करना पड़ता है। आइये हम आपको बताते हैं वास्तु शास्त्र के कुछ अहम टिप्स जिसे अपनाकर आप इन सभी समस्यों से निजात पा सकते हैं-

- वास्तु शास्त्र के अनुसार घर, दुकान और फैक्ट्री के नेऋत्य कोण को गोवर्धन पर्वत का चित्र लगाकर ऊँचा और भारी करना चाहिए।

- नये भूखंड खरीदते समय यह ध्यान रखें की भूखंड का नेऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम) सभी कोनो से ऊँचा होना चाहिए।

- वास्तु शास्त्र के अनुसार घर,फैक्ट्रीयां फार्म हॉउस का नेऋत्य कोण सभी कोनों से ऊँचा और भारी होना चाहिए।

- नवनिर्माण करते समय भी ध्यान रखें कि पूरा निर्माण कार्य भूखंड के नेऋत्य कोण में होना चाहिए इससे नेऋत्य कोण का हिस्सा भारी हो जायेगा।

- अगर आपके निर्माण कार्य में नेऋत्य कोण खाली और खुला हुआ है तो यह वास्तु दोष है, इस वास्तु दोष को ठीक करना चाहिए।

- नेऋत्य कोण के खुले हुए हिस्से में पत्थरों से एक पहाड़ जैसा निर्माण कर दें जिससे यह कोणा भारी हो जायेगा।

- नेऋत्य कोण के इस खुले हुए हिस्से में अनुपयोगी  सामग्री  को रखवा दें।

- नेऋत्य कोण के इस खुले हुए हिस्से में बड़े-बड़े पेड़ पौधे लगवा दें।

- नेऋत्य कोण के दोष निवारण के लिए राहू यंत्र कि स्थापना जरुर करें।

- भूखंड के नेऋत्य कोण  में हनुमान जी एक ध्वजा मंगलवार को लगवाने से नेऋत्य कोण भारी हो जाता है।

- भूखंड का  नेऋत्य कोण का हिस्सा यदि ज्यादा खुला हुआ है तो एक और दीवाल और बनवा कर भूखंड को दो हिस्से में बांट दें।

गुरुवार, मई 03, 2018

पुखराज रत्न के फायदे

पुखराज के फायदे (Benefits of Pukhraj in Hindi)

* पुखराज धारण करने से मान सम्मान तथा धन संपत्ति में वृद्धि होती है।

* यह रत्न शिक्षा के क्षेत्र में भी सफलता प्रदान करवाता है।

* इस रत्न से जातकों के मन में धार्मिकता तथा सामाजिक कार्य में रुचि होने लगती है।

* विवाह में आती रुकावटें तथा व्यापार में होता नुकसान से बचने के लिए भी पीला पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है।
पुखराज के स्वास्थ्य संबंधी लाभ (Health Benefits of Pukhraj)

* ज्योतिषी मानते हैं कि जिन जातकों को सीने की दर्द, श्वास, गला आदि रोगों से परेशानी है तो उन्हें पुखराज धारण करना चाहिए।

* अल्सर, गठिया, दस्त, नपुंसकता, टीबी, हृदय, घुटना तथा जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए भी पुखराज का उपयोग किया जाता है।

कैसे धारण करें पुखराज (How to Wear Yellow Sapphire)
पुखराज धारण करने से पहले इसकी विधिवत पूजा-अर्चना करनी चाहिए। बिना ज्योतिषी की सलाह और कुंडली देखे बिना पुखराज या अन्य रत्न नहीं धारण करने चाहिए।

कंगाल को भी मालामाल बना सकती है हत्था जोड़ी

कंगाल को भी मालामाल बना सकती है हत्था जोड़ी

एक विशेष प्रकार का और दुर्लभ पौधा पाया जाता है, इसका नाम है हत्था जोड़ी। इसकी जड़ को चमत्कारी उपायों में प्रयोग किया जाता है। इस जड़ को हत्था जोड़ी कहते हैं।
हत्था जोड़ी इंसान की भुजाओं के आकार की होती है। इसमें दो पंजे दिखाई देते हैं और उंगलियां भी साफ-साफ दिखाई देती हैं। पंजों की आकृति ठीक इसी प्रकार होती है, जैसे मुट्ठी बंधी हुई हो। ज्योतिषीय उपायों में इस जड़ का विशेष महत्व है। यह पौधा विशेष रूप से मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों में पाया जाता है। आमतौर वनवासी लोग इस जड़ को निकालकर बेचते हैं।
यह जड़ बहुत चमत्कारी होती है और किसी कंगाल को भी मालामाल बना सकती है। इस जड़ के असर से मुकदमा, शत्रु संघर्ष, दरिद्रता से जुड़ी परेशानियों को दूर किया जा सकता है। इस जड़ से वशीकरण भी किया जाता है और भूत-प्रेत आदि बाधाओं से भी निजात मिल सकती है।
हत्था जोड़ी को तांत्रिक विधि से सिद्ध किया जाता है। इसके बाद यह चमत्कारी असर दिखाना शुरू कर देती है। सिद्ध की हुई हत्था जोड़ी, जिस व्यक्ति के पास होती है वह बहुत जल्दी धनवान हो सकता है।
यदि कड़ी मेहनत के बाद भी आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो किसी भी शनिवार अथवा मंगलवार हत्था जोड़ी घर ले आएं। इस जड़ को लाल रंग के कपड़े में बांध लें। इसके बाद घर में किसी सुरक्षित स्थान पर या तिजोरी में रख दें। इससे आपकी आय में वृद्घि होगी एवं धन का व्यय कम होगा। तिजोरी में सिन्दूर लगी हुई हत्था जोड़ी रखने से विशेष आर्थिक लाभ होता है।
इस प्रकार सिद्ध करें हत्था जोड़ी को
होली से पहले हत्था जोड़ी अपने घर ले आएं। होली के दिन स्वयं स्नान आदि कर्मों से पवित्र हो जाएं। होली पर श्रेष्ठ मुहूर्त में हत्था जोड़ी को पवित्र जल से स्नान कराएं, पूजन करें। मंत्र जप करें। इसके बाद इस जड़ को दो हफ्तों के लिए तिल्ली के तेल में डुबोकर रख दें।
दो हफ्तों के बाद जड़ निकाल लें। इसके बाद गायत्री मंत्र जप करते हुए जड़ का पूजन करें। इलायची तथा तुलसी के पत्तों के साथ एक चांदी की डिब्बी में बंद करके घर में धन स्थान पर रखें। ऐसा करने पर धन लाभ होता है। हत्था जोड़ी को इस मंत्र से सिद्ध करें- ऊँ किलि किलि स्वाहा।

सोमवार, अप्रैल 30, 2018

जानिए किस माला के जाप का क्या फल मिलता

जानिए किस माला के जाप का क्या फल मिलता है
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भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ का बहुत अधिक महत्व है। किसी भी काम को करने से पहले पूजा-पाठ की जाती है जिससे कि आगे चल कर कोई समस्या उत्पन्न न हो। इसी साथ लोगों के मन में हर देवी-देवताओं के प्रति अपनी श्रृद्धा है जो अपने-अपने तरीके से व्यक्त करते है।

इसी तरह पूजा-पाठ के साथ-साथ तंत्र-मंत्र का भी विशेष महत्व है। यह आप अच्छी तरह जानते है कि तंत्र-मंत्र के पिता भगवान शिव है।

जिससे कि इन्हें हम लोग अपना आराध्य देव और उनके शक्ति स्वरूप मां दुर्गा को अपनी माता मानते हैं। भगवान शिव सभी की हर मनोकामना पूर्ण करते है। भगवान शिव ऐसे भगवान है जिसे प्रसन्न करना मुश्किल काम नही है।

देवी-देवताओं की पूजा-पाठ करने के लिए विभिन्न प्रकार के मालाओं का इस्तेमाल करते है, लेकिन हमें किस माला का किस देवी-देवता का जाप करना है यह नही जानते जिससे कि हमारी मनोकामना पू्र्ण नही होती। जानिए किस माला से किस मनोकामना की पूर्ति होती है।

1👉  रुद्राक्ष जिसे भगवान शिव का अंश माना जाता है। इससे शिव का जाप कर आससानी से मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती है। अगर आप शिव भगवान को प्रसन्न करना चाहते है तो रुद्राक्ष की माला से शिव के मंत्रों का जाप करे।

2👉  मां अम्बा की उपासना करने के लिए स्फटिक की माला से जप करना शुभ माना जाता है।

3👉 मां दुर्गा की उपासना लाल रंग के चंदन की माला, जिसे रक्त चंदन माला कहा जाता है, से करना चाहिए।

4👉 काली का आह्वान करने के लिए काली हल्दी या नील कमल की माला का प्रयोग करना है।

5👉 सूर्य के दोष और उन्हें प्रसन्न करने के लिए माणिक्य, गारनेट, बिल की लकड़ी की माला का उपयोग शुभ माना गया है।

6👉 मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगल ग्रह के मंत्र के साथ मूंगे और लाल चंदन की माला से जाप करना चाहिए और वही बुध ग्रह के लिए पन्ने की बनी हुई की माला से जाप करना चाहिए।

7👉 बृहस्पति देव को प्रसन्न करने के लिए हल्दी या जीया पोताज और शुक्र के लिए स्फटिक की माला से जाप करें।

8👉 अगर आप बगलामुखी की साधना कर रहे हैं तो आपको पीली हल्दी या जीयापोता की माला का इस्तेमाल करना चाहिए।

9👉 लक्ष्मीमंत्र का जाप हमेशा कमलट्टे की माला से करना चाहिए। वहीं तुलसी और चंदन की माला से विष्णु भगवान के मंत्र का जाप करना चाहिए।

10👉 चंद्रमा की शांति के लिए आप जिस मंत्र का जाप कर रहे है उस मंत्र का जाप मोती की माला से करना चाहिए।

11👉 राहु के लिए गोमेद, चंदन और कच्चे कोयले की माला उपयोगी है, वहीं केतु के लिए लहसुनिया की माला शुभ माना जाता है।

12👉 अगर आप माता लक्ष्मी की उपासना धन प्राप्त करने के लिए उनकी लाल रंग के रेशमी धागे वाली 30 मनकों की माला से जाप करें,परंतु अगर आप अपनी कोई मनोकामना पूरी होते देखना चाहते हैं तो आपके लिए 27 रुद्राक्षों की माला उपयोगी है।

13👉 मोक्ष प्राप्ति या शांति के लिए किए जा रहे मंत्र जाप के लिए 108 रुद्राक्ष को सफेद धागें से पिरोंकर जाप करें। मनोकामना पूर्ण होगी।
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नींबू के छोटे-छोटे तांत्रिक उपाय :

नींबू के छोटे-छोटे तांत्रिक उपाय :
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1) बुरी नजर लगने के बाद
व्यक्ति का चलता व्यवसाय बंद हो जाता है,
पैसों की तंगी आ जाती है,
स्वास्थ्य
संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इससे
बचने के लिए दुकानों और घरों के बाहर नींबू-मिर्च
टांग दी जाती है। ऐसा करने से
नींबू-मिर्च देखने मात्र से
ही नींबू का खट्टा और मिर्च
तीखा स्वाद बुरी नजर वाले
व्यक्ति की एकाग्रता को भंग कर देता है। जिससे
वह अधिक समय पर घर या दुकान को नहीं देख
पाता।
2) कभी-कभी रास्ते में रोड पर
नींबू-मिर्च पड़ी रहती है
या किसी चौराहे या तिराहे पर कोई नींबू
या नींबू के टुकड़े पड़े रहते हैं तो ध्यान रखें उन
आपका पैर नहीं लगाना चाहिए। हो सकता है
कि ऐसे नींबू का उपयोग किसी प्रकार के
टोटके के लिए किया गया हो। इसका आपके ऊपर बुरा प्रभाव पड़
सकता है।
3) तंत्र-मंत्र में नींबू, तरबूज, सफेद कद्दू और
मिर्च का विशेष रूप से उपयोग किया जाता है। सामान्यत:
नींबू का उपयोग बुरी नजर से बचने के
लिए किया जाता है। बुरी नजर लगने का मुख्य कारण
यह है कि जब कोई व्यक्ति किसी दुकान को,
किसी चीज को, किसी बच्चे
या अन्य इंसान को लगातार अधिक समय देखता रहता है
तो बुरी नजर लग जाती है।
4) जिस घर में नींबू का पेड़ होता है
वहां किसी भ प्रकार की नकारात्मक
ऊर्जा सक्रीय
नहीं हो पाती है। नींबू के
वृक्ष के आसपास का वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर
रहता है। इसके साथ वास्तु के अनुसार नींबू का पेड़
घर के कई वास्तु दोष भी दूर करता है।
5) अक्सर कुछ लोग दुकानों पर घरों के बाहर नींबू-
मिर्च टांगकर रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से हमारे
घर या दुकान की बुरी नजर से
रक्षा हो जाती है। वैसे तो यह तंत्र-मंत्र से
जुड़ा एक टोटका है लेकिन इसके परंपरा के पीछे
मनोविज्ञान से जुड़ा एक कारण भी है।
6) यदि किसी व्यक्ति का व्यापार ठीक से
नहीं चल रहा हो उसे शनिवार के दिन
नींबू का एक उपाय करना चाहिए। उपाय के अनुसार
एक नींबू को दुकान
की चारों दीवारों पर स्पर्श कराएं। इसके
बाद नींबू को चार टुकड़ों में अच्छे से काट लें और
चारों में दिशाओं में नींबू का एक-एक टुकड़ा फेंक दें।
इससे दुकान की नेगेटिव एनर्जी नष्ट
हो जाएगी।
7) यदि किसी बच्चे को या बड़े इंसान
को बुरी नजर लग जाए तो घर का कोई अन्य
व्यक्ति पीडि़त व्यक्ति के ऊपर से सिर से पैर तक
सात बार नींबू वार लें। इसके बाद इस नींबू
के चार टुकड़े करके किसी सुनसान स्थान
या किसी तिराहे पर फेंक आए। ध्यान रखें
नींबू के टुकड़े फेंकने के बाद पीछे न
देखें।
8) अगर आपको कड़ी मेहनत के बाद
भी किसी महत्वपूर्ण कार्य में
सफलता नहीं मिल पा रही है
तो किसी हनुमान मंदिर जाएं और अपने साथ एक
नींबू और 4 लौंग लेकर जाएं। इसके बाद मंदिर में
पहुंचकर नींबू के ऊपर चारों लौंग लगा दें। फिर
हनुमान चालीसा का पाठ करें
या हनुमानजी के मंत्रों का जप करें। इसके बाद
हनुमानजी से सफलता दिलवाने
की प्रार्थना करें और वह नींबू लेकर
कार्य करें। मेहनत के साथ ही कार्य में
सफलता मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।