शनिवार, अप्रैल 07, 2018

सुलेमानी हकीक रत्न के लाभ

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सुलेमानी हकीक रत्न के लाभ
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1. काला जादू ख़त्म करता है और बुरी नज़र से बचाव
करता है |
2 .नौकरी और व्यवसाय में आ रही अड़चनो को दूर करता
है ।
3 . सुलेमानी हकीक को धारण करने के बाद लोग आपकी
तरफ आकर्षित होने लगते है और आपको महत्त्व देने लगते
है ।
4 . सुलेमानी हकीक एक ऐसा चमत्कारी पत्थर है जो
आपको लोगो की बुरी नजर से बचा कर रखता है ।
5. आपका व्यवसाय काला जादू या टोना - टोटका की
वजह से मंदा चल रहा है तो सुलेमानी हकीक पत्थर
उसका काट कर देता है और व्यवसाय में बढ़ोतरी होती
है
6 . अगर घर में बरकत नही होती है तो बरकत होने लगती है |
7 . अगर आपके शत्रु ज़्यादा है या आपका शत्रु आपको
परेशान करता है या आप पर जादू टोना करवाता है तो
आपका उसके किए हुए जादू टोना से बचाव करता है
और आपके शत्रु को परास्त करता है | आपका शत्रु आपके
सामने शक्तिहीन हो जाता है |
8. अगर आपकी सेहत सही नही रहती है आप बार बार
बीमार होते है तो आपको सुलेमानी हकीक धारण
करना चाहिए उस से आपकी सेहत में काफ़ी अच्छा
सुधार होगा
9. सुलेमानी हकीक राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही
बाधाओ को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता
मिलने लगती है |
10. आपको सुलेमानी हकीक शनिवार को धारण करना है
व मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है व
चाँदी की अंगूठी में धारण करना है व सीधे हाथ में
करना है |
अगर आप उंगली में धारण नही करना चाहते है तो चाँदी
के लॉकेट में भी गले में धारण कर सकते है शनिवार के
दिन |
सुलेमानी हकीक को कोई भी व्यक्ति
धारण कर सकता है
सवाल और उनके जवाब :-
सवाल: सुलेमानी हकीक को कैसे धारण करें ?
जवाब: आपको सुलेमानी हकीक  शनिवार को चाँदी की अंगूठी में बनवा के सीधे हाथ की मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है |

सुंदरकांड से होने वाले दस चमत्कारी लाभ

आज मंगलवार है, आज हम आपको सुंदरकांड से होने वाले दस चमत्कारी लाभों के बारे में बतायेगें!!!!!!

श्रीरामचरितमानस में सुन्दरकाण्ड पाठ का बहुत महत्त्व है। इस पाठ के लाभ अनन्त हैं। जीवन में जब व्यक्ति को किसी समस्या का हल कहीं ढूंढे नहीं मिलता, विद्वजन सुन्दरकाण्ड के नियमित पाठ की सलाह देते हैं। कुछ बातें शोध के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धापूर्वक करने के लिए होती हैं। विद्यार्थियों, नवयुवकों के लिए मात्र इतना ही जानना पर्याप्त है कि हमारे धर्मग्रन्थ जीवन का आधार हैं, पथ-प्रदर्शक हैं।

(१) विद्यार्थी, कितने ही विषय पढ़ा करते हैं, लेकिन पढ़ाई का तनाव उनके चेहरे पर स्पष्ट देखा जा सकता है। समय निकालकर प्रतिदिन 5 मिनट भी पूरी श्रद्धा से इसका पाठ चमत्कारी परिवर्तन लाता है। इसका पाठ बुद्धि कुशाग्र करता है, और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। पढ़ा हुआ विषय याद रहता है। कहने की आवश्यकता नहीं कि परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मददगार होता है। बहुत छोटे बच्चों को सुन्दरकाण्ड का श्रवण कराया जा सकता है जो कि उतना ही लाभकारी होता है।

(२) मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति को झूठे मुक़दमे में फंसा दिया गया हो या किसी पर झूठा आरोप लगा हो, इस पाठ को करने से फैसला व्यक्ति के पक्ष में हो जाता है, और सभी आरोप झूठे साबित होते हैं।

(३) कितने ही लोग घर से निकलते समय इस भय और आशंका से ग्रस्त होते हैं कि उनके जाने के बाद घर के सदस्यों पर कोई संकट न आ जाए, कोई अनहोनी न हो जाए, ऐसी स्थिति में सुन्दरकाण्ड का पाठ करके घर से निकलना न केवल भयमुक्त करता है, बल्कि घर की सुरक्षा भी होती है। यदि आप सुनसान जगह पर रहते है और किसी अनहोनी का डर लगा रहता हो तो नित्यप्रति इसका पाठ करने से अनेक बाधाओं से मुक्ति मिलती है और आत्मबल बढ़ता है।

(४) घर का मुखिया पूरी गाड़ी का इंजन होता है। उसकी उन्नति-अवनति पूरे घर को प्रभावित करती है, इसलिए उसे यह पाठ पूर्ण श्रद्धा के साथ नियमित रूप से करना चाहिए।

(५) जब यह आभास हो कि घर में कोई बेटा या बेटी मनमानी कर रहा है, पढ़ाई में मन नहीं लगाता, सुबह देर से उठता है, तो उसे डांटने, कोसने और कलह करने के बजाय उसी कक्ष में रेकॉर्डेड सुन्दरकाण्ड बहुत धीमे स्वर में प्ले कर दें। कुछ दिनों तक नियमित रूप से यह क्रिया आश्चर्यजनक परिवर्तन लाती है।

(६) यदि घर का कोई सदस्य घर से दूर गया हो और उससे संपर्क न हो पा रहा हो या आपको उसकी कोई जानकारी न मिल पा रही हो, ऐसी स्थिति में यह पाठ करने से आपको उस सदस्य की जानकारी भी मिलेगी और सम्बंधित व्यक्ति की निश्चित ही रक्षा भी होगी।

(७) यदि किसी को अक्सर दु:स्वप्न आते हों या रात को अनावश्यक डर लगता हो, इसके पाठ से निश्चित ही लाभ मिलेगा।

(८) जीवन में कभी ऐसा भी होता है कि तमाम काबिलियत के बाद भी व्यक्ति को रोजी-रोटी भी कमाना कठिन हो जाता है, ऐसे में सुन्दरकाण्ड का पाठ निश्चित ही फलदायी होता है।

(९) रोग एवं कर्ज़ से मुक्ति हेतु यह पाठ अत्यंत लाभदायक होता है।

(१०) सुन्दरकाण्ड का पाठ पूर्ण श्रद्धा के साथ नियमित रूप से किया जाना आवश्यक है। आरम्भ करना कठिन अवश्य है किन्तु इसके पश्चात् व्यक्ति का जीवन सरलता की ओर अग्रसर होता जाता है।

घर और अपने परिवार की सुख समृधि और सुरक्षा के लिए बाँसुरी

घर और अपने परिवार की सुख समृधि और सुरक्षा के
लिए हमारे जीवन में महत्वपूर्ण, बाँसुरी
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घर की शान्ति -शंख और
घंटी तथा बाँसुरी —
भारत में ध्वनि द्वारा घर तथा वातावरण को शुद्ध करने
की परम्परा कई सदियों से चली आ
रही है.
शंख के बारे में शोध किया गया और यह निष्कर्ष निकला कि शंख
की आवाज से आसपास के सूक्ष्म
कीटाणुओं में भारी कमी आ
जाती है, इसी प्रकार घंटी व
घंटे की आवाज से कुछ अदृश्य
बुरी शक्तियां
दूर होती है. चीन में इस सिंगिंग बाउल
का प्रयोग परिवार के सदस्यों के बीच
आपसी लगाव में
सुधार लाने के लिए भी किया जाता है.
इसकी ध्वनि येंग व यिन ऊर्जा में संतुलन
लाती है.यदि
आपको लगता है या महसूस हो रहा है कि घर-परिवार में कुछ
अशांति हो रहीहै, तो इसका
नियमित प्रयोग करने से घर की ऊर्जा शुद्ध
हो जायेगी. चीन या फेंगशुई में इस
ऊर्जा को ची कहाजाता है.
बाँसुरी को शान्ति, शुभता एवं
स्थिरता का प्रतीक माना जाता है. यह उन्नति,
प्रगति एवं सकारात्मक
गुणों की वृद्धि की सूचक
भी होती है. फेंगशुई और हमारे
शास्त्रों में शुभ वस्तुओं में बाँसुरी का अत्यधिक महत्व
है. फेंगशुई के उपायों का महत्व इसलिए भी अधिक
है, क्योंकि वास्तु शास्त्र में
जहां कहीं किसी दोष से पूर्णतः मुक्ति के
लिए अशुभ निर्माण कार्य को तोड़ना आवश्यक होता है,
वहीं फेंगशुई में अशुभ निर्माण को तोड़ने
की कोई
आवश्यकता नहीं होती है. अपितु पैगोडा,
बाँसुरी आदि सकरात्मक वस्तुओं का प्रयोग कर के उस
दोष से मुक्ति पा लेते है.
बाँसुरी का निर्माण बाँस के ताने से होता है.
सभी वनस्पतियों में बाँस सबसे तेज गति से बढ़ने
वाला पौधा होता है.इसी कारण से यह विकास
का प्रतीक है.और
किसी भी वातावरण में यह अपना अस्तित्व
बनाए रखने की क्षमता इसमें होती है.
यदि किसी भी दूकान या व्यवसाय स्थल पर
इसके पौधे को लगाया जाए तो जैसे बाँस के पौधे
की वृद्धि तेज गति से होगी, वैसे
ही उस दूकान या व्यवसाय स्थल के मालिक
की भी प्रगति होगी. बाँस के
पौधे के ये सभी गुण बाँसुरी में
भी विद्यमान होते है.
बाँसुरी का उपयोग न केवल फेंगशुई में, वरन वास्तु शास्त्र
एवं ग्रह दोष निवारण में बहुत
ही उपयोगी है. वास्तु में बीम
संबंधी दोष, द्वार वेध, वृक्ष वेध,
वीथी वेध आदि सभी वेधो के
निराकरण में और अशुभ निर्माण संबंधी वास्तु दोषों में
बाँसुरी का प्रयोग होता है. ग्रह दोषों के अंतर्गत शनि,
राहू आदि पाप ग्रहों से सम्बन्धित दोषों के निवारण में
बाँसुरी का कोई विपरीत प्रभाव
नहीं होता है.
लेकिन बाँसुरी के प्रयोग में एक
सावधानी अवश्य रखनी चाहिए वह यह
है कि, जहां कहीं भी इसे लगाया जाए,
वहां इसे बिलकुल सीधा नहीं लगा कर
थोड़ा तिरछा लगाना चाहिए तथा इसका मुंह नीचे
की तरफ होना चाहिए.
जापान, चीन, हांगकांग, मलेशिया और मध्य एशिया में
इसका प्रयोग बहुतायत में किया जाता है. यदि किसी के
विकास में अनेक प्रयास करने के बाद भी बाधाए उत्पन्न
हो रही हो तो इस बाँसुरी का प्रयोग
अवश्य ही करना चाहिए.वैसे
तो ”बाँसुरी एक फायदे अनेक है”.
बाँसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब
बाँसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है,
तो बुरी आत्माएं दूर हो जाति है. और जब इसे
बजाया जाता है, तो ऐसी मान्यता है कि घरों में शुभ
चुम्बकीय प्रवाह का प्रवेश होता है.
इस प्रकार बाँसुरी प्रकृति का एक अनुपम वरदान है.
यदि सोच समझ कर इसका उपयोग किया जाए तो वास्तु
दोषों का बिना किसी तोड़ फोड के निवारण कर अशुभ
फलो से बचा जा सकता है. जहां रत्न धारण, रुद्राक्ष, यंत्र,
हवन, आदि श्रमसाध्य और खर्चीले उपाय है,
वहीं बाँसुरी का प्रयोग सस्ता, सुगम और
प्रभावी होता है. अपनी आवश्यकता के
अनुसार इसका प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है.
१:- बाँसुरी बाँस के पौधे से निर्मित होने के कारण
शीघ्र उन्नतिदायक प्रभाव रखती है
अतः जिन व्यक्तियों को जीवन में पर्याप्त सफलता प्राप्त
नहीं हो पा रही हो, अथवा शिक्षा,
व्यवसाय या नौकरी में बाधा आ रही हो,
तो उसे अपने बैडरूम के दरवाजे पर दो बाँसुरियों को लगाना चाहिए.
२:- यदि घर में बहुत ही अधिक वास्तु दोष है,
या दो या तीन दरवाजे एक सीध में है, तो घर
के मुख्यद्वार के ऊपर दो बाँसुरी लगाने से लाभ मिलता है
तथा वास्तु दोष धीरे धीरे समाप्त होने
लगता है.
३:- यदि आप आध्यात्मिक रूप से उन्नति चाहते है, या फिर
किसी प्रकार की साधना में सफलता चाहते
है तो, अपने पूजा घर के दरवाजे पर भी बाँसुरिया लगाए.
शीघ्र ही सफलता प्राप्त
होगी.
४:- बैडरूम में पलंग के ऊपर अथवा डाइनिंग टेबल के ऊपर
बीम हो तो, इसका अत्यंत खराब प्रभाव पड़ता है. इस
दोष को दूर करने के लिए बीम के दोनों ओर एक एक
बाँसुरी लाल फीते में बाँध कर
लगानी चाहिए. साथ ही यह
भी ध्यान रखे कि बाँसुरी को लगाते समय
बाँसुरी का मुंह नीचे की ओर
होना चाहिए.
५:- यदि बाँसुरी को घर के मुख हाल में या प्रवेश द्वार
पर तलवार की तरह “क्रास” के रूप में लगाया जाए,
तो आकस्मिक समस्याओं से छुटकारा मिलता है.
६:- घर के सदस्य यदि बीमार अधिक हों अथवा अकाल
मृत्यु का भय या अन्य कोई स्वास्थ्य से सम्बन्धित समस्या हो,
तो प्रत्येक कमरें के बाहर और बीमार व्यक्ति के
सिरहाने बाँसुरी का प्रयोग करना चाहिए इससे
अति शीघ्र लाभ प्राप्त होने लगेगा.
७:-
यदि किसी व्यक्ति की जन्मकुण्डली में
शनि सातवें भाव में अशुभ स्थिति में होकर विवाह में देर करवा रहे
हो, अथवा शनि की साढ़ेसती या ढैया चल
रही हो, तो एक बाँसुरी में
चीनी या बूरा भरकर
किसी निर्जन स्थान में दबा देना लाभदायक होता है इससे
इस दोष से मुक्ति मिलती है.
८:- यदि मानसिक चिंता अधिक तेहती हो अथवा पति-
पत्नी दोनों के बीच झगड़ा रहता हो, तो सोते
समय सिरहाने के नीचे
बाँसुरी रखनी चाहिए.
९:- यदि आप एक बाँसुरी को गुरु-पुष्य योग में शुभ
मुहूर्त में पूजन कर के अपने गल्ले में स्थापित करते है तो इसके
कारण आपके कार्य-व्यवसाय में
बढोत्तरी होगी, और धन आगमन के
अवसर प्राप्त होंगे.
१०:- पाश्चात्य देशो में इसे घरों में तलवार की तरह से
भी लटकाया जाता है.इसके प्रभाव स्वरुप अनिष्ट एवं
अशुभ आत्माओं एवं बुरे व्यक्तियों से घर
की रक्षा होती है.
११:- घर और अपने परिवार की सुख समृधि और
सुरक्षा के लिए एक बाँसुरी लेकर श्री कृष्ण
जन्माष्टमी के दिन रात बारह बजे के बाद भगवान
श्री कृष्ण के हाथों में सुसज्जित कर दे तो इसके प्रभाव
से पूरे वर्ष आपकी और आपके परिवार
की रक्षा तो होगी ही तथा सभी कष्ट
व बाधाए भी दूर होती जायेगी..
बाँसुरी के संबंध में एक धार्मिक मान्यता है कि जब
बाँसुरी को हाथ में लेकर हिलाया जाता है,
तो बुरी आत्माएं दूर हो जाति है. और जब इसे
बजाया जाता है, तो ऐसी मान्यता है कि घरों में शुभ
चुम्बकीय प्रवाह का प्रवेश होता है.
इस प्रकार बाँसुरी प्रकृति का एक अनुपम वरदान है.
यदि सोच समझ कर इसका उपयोग किया जाए तो वास्तु
दोषों का बिना किसी तोड़ फोड के निवारण कर अशुभ
फलो से बचा जा सकता है. जहां रत्न धारण, रुद्राक्ष, यंत्र,
हवन, आदि श्रमसाध्य और खर्चीले उपाय है,
वहीं बाँसुरी का प्रयोग सस्ता, सुगम और
प्रभावी होता है. अपनी आवश्यकता के
अनुसार इसका प्रयोग करके लाभ उठाया जा सकता है.

सिन्दूर के अचूक टोटके

सिन्दूर के अचूक टोटके

इस प्रकार एक सिन्दूर हमारे जीवन में अनेक खुशियों के लेकर आता है. आज ही सिन्दूर का उपयोग करें और अपने घर से दुर्भाग्य को दूर कर दे...

1:- जिन व्यक्तियों को आए दिन वाहनादि से दुर्घटना का सामना करना पड़ रहा है, तो उन्हें मंगलवार के दिन श्री हनुमान जी के मंदिर में सिन्दूर दान करना चाहिए. इससे शीघ्र हो दुर्घटना का भय आदि समाप्त होता है.

2:- यदि आपको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है तो, एकाक्षी नारियल पर सिन्दूर चड़ा कर उसे लाल वस्त्र में बांधकर माँ लक्ष्मी से धन की प्रार्थना करते हुए अपने व्यवसाय स्थल पर रख देना चाहिए इसके प्रभाव से धन की समस्या दूर होने के साधन बनते जायेंगे.

3:- यदि सूर्य अथवा मंगल आपके लिए मारक ग्रह है और उनकी महादशा या अंतर्दशा चल रही है, तो सिन्दूर को बहते जल में प्रवाहित करें ऐसा करने से सम्बंधित ग्रह का प्रभाव कम हो जाता है. और सूर्य तथा मंगाल मारक न बन कर शुभ ग्रह का फल देने लगते है.

4:- यदि प्रतियोगी परीक्षा में आप बैठ रहे है, तो गुरु-पुष्य योग में अथवा शुक्ल पक्ष के पुष्य योग में श्री गणेश जी के मंदिर में सिन्दूर का दान करने से परीक्षा में परिश्रम से अधिक सफलता प्राप्त होगी, तथा आत्मविश्वास की वृद्धि भी होगी.

5:- यदि रक्त से सम्बंधित किसी रोग से आप पीड़ित है, तो सिन्दूर को अपने ऊपर से उसारकर बहते हुए जल में प्रवाहित करें, ऐसा करने से रोग में लाभ मिलता है. और रोग शीघ्र शांत हो जाता है.

9:- अपने घर के मुख्यद्वार के ऊपर सिन्दूर चढ़ी हुई श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने से घर में सुख समृद्धि एवं शान्ति बनी रहती है.

10:- यदि आप कर्जों से परेशान है. अथवा व्यवसाय में बाधा उत्पन्न हो रही हो अथवा आय में वृद्धि नहीं हो पा रही हो, तो सिन्दूर का यह प्रयोग आपके लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा, एक सियार सिंगी लेकर उसे एक डिब्बी में रख ले और उसे प्रत्येक पुष्य नक्षत्र में सिन्दूर चढाते रहे. ऐसा करने से शीघ्र ही शुभ फल मिलेगा.

11:- अपनी तिजोरी में सिन्दूर युक्त हत्था जोड़ी रखने से आर्थिक लाभ में वृद्धि होने लगती है.

12:- जो महिलाए अपने परिवार और पति को स्वस्थ और आर्थिक समस्या से मुक्त देखना चाहती है, उन्हें प्रतिदिन अपनी मांग में सिदूर प्रातः और संध्या के समय अवश्य भरना चाहिए.

मांग में सिन्दूर भरने से शास्त्र में वर्णित है कि जो महिला अपनी मांग नित्य प्रातः और संध्या के समय भरती है उसका परिवार हमेशा रोगमुक्त, भयमुक्त तथा संपन्न रहता है. औए पति की आयु में वृद्धि होती है घर में कभी कर्ज नहीं चढता है और वह महिला सदा सुहागन का जीवन व्यतीत करती है.

13:- जो महिला कामकाजी है यदि वो सिन्दूर से प्रतिदिन अपनी मांग भरती है तो उसकी उन्नति होने लगती है. तथा घर बरकत बनी रहती है.

14:- मांग भरने से महिला के ससुराल पक्ष को ही लाभ नहीं मिलता बल्कि उसके मायके परिवार में भी लाभ होता है. उसके भाई- बहनों से अच्छे सम्बन्ध होने लगते है. तथा सदभाव बढता है.

किसी भी प्रकार के भेदभाव समाप्त हो जाते है चाहे वह ससुराल या मायके के पक्ष के हो।

*पवित्र शंख के चमत्कारिक रहस्य...*

*पवित्र शंख के चमत्कारिक रहस्य...*

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*क्या शंख हमारे सभी प्रकार के कष्ट दूर कर सकता है? भूत-प्रेत और राक्षस भगा सकता है? क्या शंख में ऐसी शक्ति है कि वह हमें धनवान बना सकता है? क्या शंख हमें शक्तिशाली व्यक्ति बना सकता है?*

*पुराण कहते हैं कि सिर्फ एकमात्र शंख से यह संभव है। शंख की उत्पत्ति भी समुद्र मंथन के दौरान हुई थी।*

शिव को छोड़कर सभी देवताओं पर शंख से जल अर्पित किया जा सकता है। शिव ने शंखचूड़ नामक दैत्य का वध किया था अत: शंख का जल शिव को निषेध बताया गया है।

शंख के नाम से कई बातें विख्यात है जैसे योग में शंख प्रक्षालन और शंख मुद्रा होती है, तो आयुर्वेद में शंख पुष्पी और शंख भस्म का प्रयोग किया जाता है। प्राचीनकाल में शंक लिपि भी हुआ करती थी। विज्ञान के अनुसार शंख समुद्र में पाए जाने वाले एक प्रकार के घोंघे का खोल है जिसे वह अपनी सुरक्षा के लिए बनाता है।

शंख से वास्तुदोष ही दूर नहीं होता इससे आरोग्य वृद्धि, आयुष्य प्राप्ति, लक्ष्मी प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति, पितृ-दोष शांति, विवाह आदि की रुकावट भी दूर होती है। इसके अलावा शंख कई चमत्कारिक लाभ के लिए भी जाना जाता है। उच्च श्रेणी के श्रेष्ठ शंख कैलाश मानसरोवर, मालद्वीप, लक्षद्वीप, कोरामंडल द्वीप समूह, श्रीलंका एवं भारत में पाये जाते हैं।

*त्वं पुरा सागरोत्पन्नो विष्णुना विधृत: करे।*
*नमित: सर्वदेवैश्य पाञ्चजन्य नमो स्तुते।।*

वर्तमान समय में शंख का प्रयोग प्राय: पूजा-पाठ में किया जाता है। अत: पूजारंभ में शंखमुद्रा से शंख की प्रार्थना की जाती है। शंख को हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण और पवित्र माना गया माना गया है। शंख कई प्रकार के होते हैं। शंख के चमत्का‍रों और रहस्य के बारे में पुराणों में विस्तार से लिखा गया है।

*शंख और शंख ध्वनि के रहस्य..*
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पहला रहस्य👉  शंख के प्रकार : शंख के प्रमुख 3 प्रकार होते हैं:- दक्षिणावृत्ति शंख, मध्यावृत्ति शंख तथा वामावृत्ति शंख। इन शंखों के कई उप प्रकार होते हैं। शंखों की शक्ति का वर्णन महाभारत और पुराणों में मिलता है। यह प्रकार इस तरह भी है- वामावर्ती, दक्षिणावर्ती तथा गणेश शंख।

शंख के अन्य प्रकार👉  लक्ष्मी शंख, गोमुखी शंख, कामधेनु शंख, विष्णु शंख, देव शंख, चक्र शंख, पौंड्र शंख, सुघोष शंख, गरूड़ शंख, मणिपुष्पक शंख, राक्षस शंख, शनि शंख, राहु शंख, केतु शंख, शेषनाग शंख, कच्छप शंख, गोमुखी शंख, पांचजन्य शंख, अन्नपूर्णा शंख, मोती शंख, हीरा शंख, शेर शंख आदि प्रकार के होते हैं।

*द्विधासदक्षिणावर्तिर्वामावत्तिर्स्तुभेदत:*
*दक्षिणावर्तशंकरवस्तु पुण्ययोगादवाप्यते*
*यद्गृहे तिष्ठति सोवै लक्ष्म्याभाजनं भवेत्*

द्वितीय रहस्य👉  शंख दो प्रकार के होते हैं:- दक्षिणावर्ती एवं वामावर्ती। लेकिन एक तीसरे प्रकार का भी शंख पाया जाता है जिसे मध्यावर्ती या गणेश शंख कहा गया है।

* दक्षिणावर्ती शंख पुण्य के ही योग से प्राप्त होता है। यह शंख जिस घर में रहता है, वहां लक्ष्मी की वृद्धि होती है। इसका प्रयोग अर्घ्य आदि देने के लिए विशेषत: होता है।

* वामवर्ती शंख का पेट बाईं ओर खुला होता है। इसके बजाने के लिए एक छिद्र होता है। इसकी ध्वनि से रोगोत्पादक कीटाणु कमजोर पड़ जाते हैं।

* दक्षिणावर्ती शंख के प्रकार : दक्षिणावर्ती शंख दो प्रकार के होते हैं नर और मादा। जिसकी परत मोटी हो और भारी हो वह नर और जिसकी परत पतली हो और हल्का हो, वह मादा शंख होता है।

* दक्षिणावर्ती शंख पूजा : दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना यज्ञोपवीत पर करनी चाहिए। शंख का पूजन केसर युक्त चंदन से करें। प्रतिदिन नित्य क्रिया से निवृत्त होकर शंख की धूप-दीप-नैवेद्य-पुष्प से पूजा करें और तुलसी दल चढ़ाएं।

प्रथम प्रहर में पूजन करने से मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। द्वितीय प्रहर में पूजन करने से धन- सम्पत्ति में वृद्धि होती है। तृतीय प्रहर में पूजन करने से यश व कीर्ति में वृद्धि होती है। चतुर्थ प्रहर में पूजन करने से संतान प्राप्ति होती है। प्रतिदिन पूजन के बाद 108 बार या श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जप करें।

तीसरा रहस्य👉  विविध नाम : शंख, समुद्रज, कंबु, सुनाद, पावनध्वनि, कंबु, कंबोज, अब्ज, त्रिरेख, जलज, अर्णोभव, महानाद, मुखर, दीर्घनाद, बहुनाद, हरिप्रिय, सुरचर,  जलोद्भव, विष्णुप्रिय, धवल, स्त्रीविभूषण, पांचजन्य, अर्णवभव आदि।

चौथा रहस्य👉  महाभारत यौद्धाओं के पास शंख : महाभारत में लगभग सभी यौद्धाओं के पास शंख होते थे। उनमें से कुछ यौद्धाओं के पास तो चमत्कारिक शंख होते थे। जैसे भगवान कृष्ण के पास पाञ्चजन्य शंख था जिसकी ध्वनि कई किलोमीटर तक पहुंच जाती थी।

*पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जय:।*
*पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदर:।।*-महाभारत

अर्जुन के पास देवदत्त, युधिष्ठिर के पास अनंतविजय, भीष्म के पास पोंड्रिक, नकुल के पास सुघोष, सहदेव के पास मणिपुष्पक था। सभी के शंखों का महत्व और शक्ति अलग-अलग थी। कई देवी देवतागण शंख को अस्त्र रूप में धारण किए हुए हैं। महाभारत में युद्धारंभ की घोषणा और उत्साहवर्धन हेतु शंख नाद किया गया था।

अथर्ववेद के अनुसार, शंख से राक्षसों का नाश होता है- शंखेन हत्वा रक्षांसि। भागवत पुराण में भी शंख का उल्लेख हुआ है। यजुर्वेद के अनुसार युद्ध में शत्रुओं का हृदय दहलाने के लिए शंख फूंकने वाला व्यक्ति अपिक्षित है।

अद्भुत शौर्य और शक्ति का संबल शंखनाद से होने के कारण ही योद्धाओं द्वारा इसका प्रयोग किया जाता था। श्रीकृष्ण का ‘पांचजन्य’ नामक शंख तो अद्भुत और अनूठा था, जो महाभारत में विजय का प्रतीक बना।

पांचवां रहस्य👉  नादब्रह्म : शंख को नादब्रह्म और दिव्य मंत्र की संज्ञा दी गई है। शंख की ध्वनि को ॐ की ध्वनि के समकक्ष माना गया है। शंखनाद से आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। शंख से निकलने वाली ध्वनि जहां तक जाती है वहां तक बीमारियों के कीटाणुओं का नाश हो जाता है।

छठा रहस्य👉  धन प्राप्ति में सहायक शंख : शंख समुद्र मंथन के समय प्राप्त चौदह अनमोल रत्नों में से एक है। लक्ष्मी के साथ उत्पन्न होने के कारण इसे लक्ष्मी भ्राता भी कहा जाता है। यही कारण है कि जिस घर में शंख होता है वहां लक्ष्मी का वास होता है।

*यदि मोती शंख को कारखाने में स्था‍पित किया जाए तो कारखाने में तेजी से आर्थिक उन्नति होती है। यदि व्यापार में घाटा हो रहा है, दुकान से आय नहीं हो रही हो तो एक मोती शंख दुकान के गल्ले में रखा जाए तो इससे व्यापार में वृद्धि होती है।

*यदि मोती शंख को मंत्र सिद्ध व प्राण-प्रतिष्ठा पूजा कर स्थापित किया जाए तो उसमें जल भरकर लक्ष्मी के चित्र के साथ रखा जाए तो लक्ष्मी प्रसन्न होती है और आर्थिक उन्नति होती है।

मोती शंख को घर में स्थापित कर रोज
*ॐ श्री महालक्ष्मै नम:'* 11 बार बोलकर 1-1 चावल का दाना शंख में भरते रहें। इस प्रकार 11 दिन तक प्रयोग करें। यह प्रयोग करने से आर्थिक तंगी समाप्त हो जाती है।
इसी तरह प्रत्येक शंख से अलग अलग लाभ प्रा‍प्त किए जा सकते हैं।

सातवां रहस्य👉   शंख पूजन का लाभ : शंख सूर्य व चंद्र के समान देवस्वरूप है जिसके मध्य में वरुण, पृष्ठ में ब्रह्मा तथा अग्र में गंगा और सरस्वती नदियों का वास है। तीर्थाटन से जो लाभ मिलता है, वही लाभ शंख के दर्शन और पूजन से मिलता है।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, शंख चंद्रमा और सूर्य के समान ही देवस्वरूप है। इसके मध्य में वरुण, पृष्ठ भाग में ब्रह्मा और अग्र भाग में गंगा और सरस्वती का निवास है। शंख से शिवलिंग, कृष्ण या लक्ष्मी विग्रह पर जल या पंचामृत अभिषेक करने पर देवता प्रसन्न होते हैं।

आठवां रहस्य👉  सेहत में फायदेमंद शंख : शंखनाद से सकारात्मक ऊर्जा का सर्जन होता है जिससे आत्मबल में वृद्धि होती है। शंख में प्राकृतिक कैल्शियम, गंधक और फास्फोरस की भरपूर मात्रा होती है। प्रतिदिन शंख फूंकने वाले को गले और फेफड़ों के रोग नहीं होते।

शंख बजाने से चेहरे, श्वसन तंत्र, श्रवण तंत्र तथा फेफड़ों का व्यायाम होता है। शंख वादन से स्मरण शक्ति बढ़ती है। शंख से मुख के तमाम रोगों का नाश होता है। गोरक्षा संहिता, विश्वामित्र संहिता, पुलस्त्य संहिता आदि ग्रंथों में दक्षिणावर्ती शंख को आयुर्वद्धक और समृद्धि दायक कहा गया है।

पेट में दर्द रहता हो, आंतों में सूजन हो अल्सर या घाव हो तो दक्षिणावर्ती शंख में रात में जल भरकर रख दिया जाए और सुबह उठकर खाली पेट उस जल को पिया जाए तो पेट के रोग जल्दी समाप्त हो जाते हैं। नेत्र रोगों में भी यह लाभदायक है। यही नहीं, कालसर्प योग में भी यह रामबाण का काम करता है।

नौवां रहस्य.👉  सबसे बड़ा शंख : विश्व का सबसे बड़ा शंख केरल राज्य के गुरुवयूर के श्रीकृष्ण मंदिर में सुशोभित है, जिसकी लंबाई लगभग आधा मीटर है तथा वजन दो किलोग्राम है।

दसवां रहस्य👉  श्रेष्ठ शंख के लक्षण:-

*शंखस्तुविमल:* *श्रेष्ठश्चन्द्रकांतिसमप्रभ:*
*अशुद्धोगुणदोषैवशुद्धस्तु सुगुणप्रद:*

अर्थात् निर्मल व चन्द्रमा की कांति के समानवाला शंख श्रेष्ठ होता है जबकि अशुद्ध अर्थात् मग्न शंख गुणदायक नहीं होता। गुणोंवाला शंख ही प्रयोग में लाना चाहिए। क्षीरसागर में शयन करने वाले सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु के एक हाथ में शंख अत्यधिक पावन माना जाता है। इसका प्रयोग धार्मिक अनुष्ठानों में विशेष रूप से किया जाता है।

ग्यारहवां रहस्य👉  शंख से वास्तु दोष का निदान : शंख से वास्तु दोष भी मिटाया जा सकता है। शंख को किसी भी दिन लाकर पूजा स्थान पर पवित्र करके रख लें और प्रतिदिन शुभ मुहूर्त में इसकी धूप-दीप से पूजा की जाए तो घर में वास्तु दोष का प्रभाव कम हो जाता है। शंख में गाय का दूध रखकर इसका छिड़काव घर में किया जाए तो इससे भी सकारात्मक उर्जा का संचार होता है।

बारहवां रहस्य👉
*गणेश शंख:*इस शंख की आकृति भगवान श्रीगणेश की तरह ही होती है। यह शंख दरिद्रता नाशक और धन प्राप्ति का कारक है।

*अन्नपूर्णा शंख :*अन्नपूर्णा शंख का उपयोग घर में सुख-शान्ति और  श्री समृद्धि के लिए अत्यन्त उपयोगी है। गृहस्थ जीवन यापन करने वालों को प्रतिदिन इसके दर्शन करने चाहिए।

*कामधेनु शंख :*कामधेनु शंख का उपयोग तर्क शक्ति को और प्रबल करने के लिए किया जाता है। इस शंख की पूजा-अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

*मोती शंख :*इस शंख का उपयोग घर में सुख और शांति के लिए किया जाता है। मोती शंख हृदय रोग नाशक भी है। मोती शंख की स्थापना पूजा घर में सफेद कपड़े पर करें और प्रतिदिन पूजन करें, लाभ मिलेगा।

*ऐरावत शंख :*ऐरावत शंख का उपयोग मनचाही साधना सिद्ध को पूर्ण करने के लिए, शरीर की सही बनावट देने तथा  रूप रंग को और निखारने के लिए किया जाता है।  प्रतिदिन इस शंख में जल डाल कर उसे ग्रहण करना चाहिए। शंख में जल प्रतिदिन 24 - 28 घण्टे तक रहे और फिर उस जल को ग्रहण करें, तो चेहरा कांतिमय होने लगता है।

*विष्णु शंख :* इस शंख का उपयोग लगातार प्रगति के लिए और असाध्य रोगों में शिथिलता के लिए किया जाता है। इसे घर में रखने भर से घर रोगमुक्त हो जाता है।

*पौण्ड्र शंख :* पौण्ड्र शंख का उपयोग मनोबल बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग विद्यार्थियों के लिए उत्तम है। इसे विद्यार्थियों को अध्ययन कक्ष में पूर्व की ओर रखना चाहिए।

*मणि पुष्पक शंख :*मणि पुष्पक शंख की पूजा-अर्चना से यश कीर्ति, मान-सम्मान प्राप्त होता है। उच्च पद की प्राप्ति के लिए भी इसका पूजन उत्तम है।

*देवदत्त शंख  :*इसका उपयोग दुर्भाग्य नाशक माना गया है। इस शंख का उपयोग न्याय क्षेत्र में विजय दिलवाता है। इस शंख को शक्ति का प्रतीक माना गया है। न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग इसकी पूजा कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

*दक्षिणावर्ती शंख :*इस शंख को दक्षिणावर्ती इसलिए कहा जाता है क्योंकि जहां सभी शंखों का पेट बाईं ओर खुलता है वहीं इसका पेट विपरीत दाईं और खुलता है। इस शंख को देव स्वरूप माना गया है।

दक्षिणावर्ती शंख के पूजन से खुशहाली आती है और लक्ष्मी प्राप्ति के साथ-साथ सम्पत्ति भी बढ़ती है। इस शंख की उपस्थिति ही कई रोगों का नाश कर देती है। दक्षिणावर्ती शंख पेट के रोग में भी बहुत लाभदायक है। विशेष कार्य में जाने से पहले दक्षिणावर्ती शंख के दर्शन करने भर से उस काम के सफल होने की संभावना बढ़ जाती है।