रविवार, अगस्त 19, 2012

आवश्यक पंचाग अभिज्ञान ---


आवश्यक पंचाग अभिज्ञान ---

सर्वसाधारण हेतु पंचांग अभिज्ञान अवलोकन विधि-भारतीय पच्चाग्ड़ के प्रमुख 5 अंग होते है अतः पच्चाग्डसंज्ञक कहलाता है, यथा-तिथिवार्रष्च नक्षंत्र योगः करणमेव च। 
एतैः पंचभिरंगै संयुतं पच्चाग्उ़माख्याते।।
एवमेव प्रकारन्रेऽपिसूत्रम- तिथिर्वासरनक्षत्रे योगः करणमेव च इति पच्चाग्ड़माख्यातं व्रतपर्वनिदर्षकम।। 
तिथि,वार,नक्षत्र, योग तथा करण ये पांच विभाग है।

प्रथम 1 भाग तिथि तत्वः -----
सूर्यचन्द्रयोर्या स्थितिः सा एवं तिथिः अमावस्या के अन्त पर सूर्य चन्द्र दोनो एक समान राषि अषं पर रहते है।, तथा षीध्र गतिमान चन्द्रमा का जब सूर्य से क्रकिम 12 अंषो का अन्तर सिद्व होता है, उस कालांष उन्तरांष को प्रतिदिता, 12 से 24 अंषान्तर को द्वितिया एवमेव क्रमषः 24 से 36 अंषान्तर के बनते तृतिया तिथि सिद्व होकर अग्रिम क्रमिक रूप से 12-12 अंष पर तिथि क्रम वृद्विषील रहते 168 से 180 अंषान्तर पर पूर्णिमा का स्वरूप् प्रत्यक्ष प्रतीत होता है। तथा 180 अंष के अन्त मे 167 अंष तक 12 अंष न्यूनसन्तर होते कृश्णपक्ष की द्वितिया तिथि इसी प्रकार न्यूनान्तर होत-होते 12 से 0 षून्य अंषान्तर पर 30 अमावस्या तिथि का स्वरूप बनेगा। प्रतिपदा - द्वितीया - तृतीया - चतुर्थी - पंचमी - शश्ठी - सप्तमी -  अश्टमी - नवमी - दषमी - एकादषी - द्वादषी - त्रयोदषी - चतुर्दषी और पूर्णिमा 15 षुक्ल पक्ष 1 से 15 पूर्णिमा तक पुनः प्रतिपदा से क्रमषः चतुर्दषी अमावस्या 30 संज्ञक के कृश्णपक्ष की तिथि मानी जाती है। पक्ष संबा 1 चान्द्र मास में 2 पक्ष होते है, पहला षुक्ल पक्ष 1 से 15 तक पुनः कृश्णपक्ष 1 से 30 अमावस्था तिथि तक 1 द्वितीय 2 भाग वारों को विज्ञान। एक सूर्योदय से द्वितीय सूर्योदय के पूर्वसमय को-वार माना है। वार प्रवृति सूर्योदय से ही क्रमषः रवि - सोम - मंगल - बुध - गुरू - षुक् - षनि आदि 7 वार क्रमषः चलते है। अंग्रेजी दिनांक अद्र्वरात्रि 120 से बदल जाती है, परन्तु वार प्रवृति सूर्योदय से ही मान्य होती है।

तिथि क्षयवृद्वि सूत्र -
1 तिथि का मान 2 ----
सुर्योदय मे स्पर्ष करे तो वह वृद्वि तिथि तथा 1 ही तिथि का मान प्रथम सूर्योदय से द्वितीय पूर्व ही पूरक हो जावे तो वह क्ष तिथि बनती है। यदि नियामक क्षय वृद्वि स्थिति का-नक्षत्र -योगो के उपकरणों हेतु भी मान्य रहता है। तृतीय 3 भाग-नक्षत्रनिर्णय सम्पूर्ण आकाष 360 अंषो का गणनामत मान्य है, तथा समस्त भच्रक की 27 भागो से विभक्त करने से 13 अंष 20 कला अर्थात 800 कला का 1 क्षेत्र अष्विन्यादि रवती प्र्यन्त 27 नक्षत्रो को भाग मान्य है। 
नक्षरतितीति नक्षत्राः---
 ये नक्षत्र स्थिर बिन्दु का मान के है, जिस दिन समय को चन्द्रमा पृथ्वी से जिस नक्षत्रपुच्च मे दिखे उस दिन पच्चाग्ड़ मे वही नक्षत्र रहता है। अष्विनी, भरणी, कृतिका, रोहिणी, मृगषिरा, आर्दा, पुनर्वसु, पुश्य, आष्लेशा, मधा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराशढ़, श्रवण, घनिश्ठा, षतभिशा, पूर्वाभद्रपद, उत्तराशाढ़, रेवती, ये 27 नक्षत्र क्रमणः है। इनमे अभिजित का मान उत्तराशाढ़ नक्षत्र की अन्तिम 15 धटी और श्रवण प्रारम्भ की 4 घटी का मान अभिजित नक्षत्र का है। 1 नक्षत्र मे 4 चरण होते है, प्रति चरण 3 अंष 20 कला तथा 1 राषि मे 9 चरण का मानक बनता है। 

चतुर्थ 4 भाग-----
योगो के नाम-सुर्य चन्द्र गति मे 13 अंष 20 कला का अन्तर होने से 1 योग का कालांष बनता है अर्थात सुर्य की माघ्यमिक गति दैनिक 1 अंष है और चन्द्रमा 13 अंष 20 कलादि, जिस समय ये दोनो मिलकर औसतम 13 अंष  20 कला की दुरी आकाष मे पार करेगें। उस कालाषं का एक योग नाम बनेगा। योग भी 27 होते है तथा विश्कुम्भ , प्रीति, आयुश्मान, सौभाग्य, षोभन, अतिगड़, सुकर्मा, धृति, षूल,गण्ड, वृद्वि,घ्रुव,व्याघात,हर्शण,वज, सिद्वि, व्यपिपात,वरियान, परिघ, षिव, सिद्विख् साघ्य,षुभ,षुक्ल,बह्म, ऐन्द्र, वैधृति ये 27 योग है।

पंचम 5 भाग करण----
 तिथि के आधे भाग को कारण कहते है, तिथियो के सूक्ष्म प्रभाव जानने के लिऐ प्रत्येक तिथि के 2 ळााग मान्य किये है यथा-तिथ्यर्थ करणं स्यात, प्रत्येक भाग की करण संज्ञा है, सुर्य चन्द्रयोर्मघ्र्य शट अंषांतरे करणमेक बव, बालव-कौलव-तैतिक- गर वाणिज-विश्टि (भढ़ा) ये 7 चलसंज्ञक तथा षकुनि-चतुश्पद-नाग -किस्तुध्य ये 6 स्थिर करण है। एवं भारतीय पंचाग के पांच तत्व। 



Pt. Pradeep Upadhyay,
                                                                        Shree Durga Jyotish Karyalaya,
                                                                        Jodliya Mandir, Luhar Mohalla,
                                             Lanka Gate Road, JHALRAPATAN CITY-326023 
                                                        Distt.- JHALAWAR (RAJ.)
                                               Mob.-09460045530, Phone No.-(07432)241790 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें