मंगलवार, मई 08, 2018

शास्त्रों में चींटियों को दाना डालना क्यों शुभ कहा गया?

शास्त्रों में चींटियों को दाना डालना क्यों शुभ कहा गया?

चींटी को श्रीहरि विष्णु का प्रतीक माना जाता है। प्रहलाद को मारने हेतु विभिन्न प्रकारों से सताया गया था। हिरण्यकश्यपु ने कहा कि यदि हरि पर इतना विश्वास है तो इस दहकते लोहे के खंबे से लिपटकर दिखाओ। तभी प्रह्लादजी ने अपने आराध्य श्री विष्णु को चींटी के रूप में उस लौह स्तंभ पर घूमते देखा तो खुशी-खुशी उससे लिपट गए। तप्त लौह स्तंभ शीतल हो गया।

चींटी रूपी नारायण को भोजन कराने से राहु एवं शनि के कोपों का शमन होता है। इसके लिए राहु, केतु एवं शनि की महादशाओं, अंतर्दशाओं, प्रत्यंतर दशाओं के काल में कसार (शुद्ध घी से भुना आटा जिसमें शक्कर मिश्रित हो) बनाकर जंगल में चींटियों के बिलों पर डालें अथवा कसार को सूखे गोले में भर शनिवार की प्रातः जंगल में पीपल, बरगद, पिलखन अथवा शमी वृक्ष की जड़ में दबाएं।

यह प्रयोग विशेषकर ग्रीष्म अथवा वर्षा ऋतु में करें निश्चित रूप से क्रूर ग्रहों की क्रूर शक्तियों का शमन होगा। चीटियों को शाम के समय भोजन देना ज्यादा अच्छा माना जाता है।

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