बुधवार, मई 09, 2018

तिलक लगाने के बाद चावल के दाने क्यों लगाए जाते हैं

तिलक लगाने के बाद चावल के दाने क्यों लगाए जाते हैं

ये तो आपने अक्सर देखा होगा कि जब आपके घर में कोई उत्सव, विवाह या पूजा--पाठ का समय होता है, तो इसकी शुभारम्भ व्यक्ति को तिलक लगाकर ही किया जाता है क्योंकि तिलक लगाना शुभ माना जाता है, परन्तु आपने कभी ये सोचा है कि तिलक लगाने के बाद व्यक्ति के माथे पर चावल क्यों लगाए जाते हैं। पूजा--पाठ के समय माथे पर कुमकुम का तिलक लगाते समय चावल के दाने भी ललाट पर जरूर लगाए जाते हैं।
अगर वैज्ञानिक दृष्टि की बात करें तो माथे पर तिलक लगाने से दिमाग में शांति और शीतलता बनी रहती है. इसके इलावा चावल को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है. वही अगर शास्त्रों की बात करें तो चावल को हविष्य अर्थात् हवन में देवी--देवताओ को चढ़ाने वाला शुद्ध अन्न माना जाता है. तभी तो हम हर विशेष अवसरपर चावल अवश्य (जरूर) लगाते हैं। दरसल ऐसा माना जाता है कि कच्चे चावल व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं। यही कारण है कि शुभ अवसर पर न केवल माथे पर तिलक लगाया जाता है, बल्कि पूजा की विधि संपन्न करने के लिए भी चावलों का प्रयोग किया जाता है।  आपने अक्सर देखा होगा कि पूजा में तिलक और पुष्प के साथ कुछ मीठा और चावल जरूर होते है. वो इसलिए क्योंकि पूजा की विधि बिना चावलों के पूरी नहीं हो सकती. यही कारण है कि चावलों को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और इसे माथे पर तिलक के साथ लगाया जाता है. इसके इलावा पूजा में भी कुमकुम के तिलक के ऊपर चावल के दाने इसलिए लगाए जाते हैं ताकि हमारे आस--पास जो नकारात्मक ऊर्जा है, वो दूर जा सके या समाप्त हो सके इसे लगाने का उद्देश्य यही होता है कि वो नकारात्मक ऊर्जा वास्तव में सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित हो सके।
यक़ीनन इसे पढ़ने के बाद आप समझ गए होंगे कि माथे पर कुमकुम का तिलक लगाने के बाद उसके ऊपर चावल के दाने क्यों लगाए जाते हैं।

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