#शुगर (मधुमेह) और #गणेश_पूजा
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भगवान् #गणेश की किसी भी तस्वीर के सामने सदाही आपने लड्डू व मिष्ठान का थाल लगा देखा होगा.मूषक महाराज सामने हाथ बांधे खड़े रहते हैं.मूषक इच्छाओं का प्रतिनिधि है.गणेश जी स्वयं मधुमेह से पीड़ित हैं.
सामने लड्डुओं का भरा थाल होकर भी अपनी इच्छाओं को कैसे नियंत्रित किया जाता है,ये शिक्षा हमें गणेश जी से प्राप्त होती है.अपनी लालसा को चूहे के समान अपने सामने छोटा बने रहने दो.उसे हावी मत होने दो.
शाश्त्रों में उल्लेख मिलता है की मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति को सदा गणेश जी की उपासना कर उन्हें चढाया गया भोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से इस रोग में आराम मिलता है.आप सोच रहे होंगे की मीठा खाना तो सुगर की बीमारी में जहर के समान है,फिर ये क्या बात हुई? वास्तव में मीठे का भोग गणेश जी को नहीं लगता है.ये क्रम कैसे शुरू हो गया पता नहीं.
शाश्त्रों में गणेश जी की उपासना का जो मन्त्र प्रचलित है जरा उस पर ध्यान दें "गजाननमभूत गनादिसेवितम कपिथ्जम्बू फल चारू भक्षणं ,उमासुतं शोक विनाश्काराम ,विघ्नेस्वर पद पाद पंकजम"
अर्थात गजानन को कैथ और जामुन का फल भोग के रूप में और स्वयं प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए.
अब आप सब को पता है की जामुन और कैथ को सदा ही मधुमेह में लाभकारी माना गया है.श्लोक में जो उमासुत का उल्लेख आता है वह गणेश न होकर समस्त मनुष्यों के लिए प्रयोग हुआ है.उमा जगद्जननी हैं और पृथ्वी के समस्त मनुष्य उसकी संतान हैं.
अत: अर्थ यह हुआ की जो भी इस विधि से गणेश जी की उपासना करता है,उसके समस्त रोगों का निवारण होता है.
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