मंगलवार, मई 15, 2018

इन वास्तुदोष के कारण होता हें मधुमेह/शुगर या डायबिटीज का रोग..!!!

इन वास्तुदोष के कारण होता हें मधुमेह/शुगर
या डायबिटीज का रोग..!!!
मधुमेह /डायबिटीज निवारण हेतु के लिए वास्तु नियम–
वास्तु शास्त्र प्राचीन वैज्ञानिक जीवन
शैली है वास्तु विज्ञान सम्मत तो है
ही साथ ही वास्तु का सम्बन्ध ग्रह
नक्षत्रों एवम धर्म से भी है ग्रहों के अशुभ होने
तथा वास्तु दोष विद्यमान होने से व्यक्ति को बहुत भयंकर
कष्टों का सामना करना पड़ता है. वास्तु शास्त्र अनुसार पंच
तत्वों पृथ्वी,जल,अग्नि,आकाश और वायु तथा वास्तु के
आठ कोण दिशाए एवम ब्रह्म स्थल केन्द्र को संतुलित
करना अति आवश्यक होता है जिससे जीवन हमारा एवं
परिवार सुखमय रह सके.
चिकित्सा शास्त्र में बहुत से लक्षण सुनने और देखने में मिलते है
लेकिन वास्तु शास्त्र में बिलकुल स्पष्ट है कि घर/भवन
का दक्षिण-पश्चिम भाग अर्थात नैऋत्य कोण ही इस
रोग का जनक बनता है देखिये कैसे---
( कुछ प्रमुख वास्तुदोष जिनके कारण मधुमेह/शुगर
या डायबिटीज का रोग हो सकता हें)....
—- दक्षिण-पश्चिम कोण में कुआँ,जल बोरिंग या भूमिगत
पानी का स्थान मधुमेह बढाता है।
—–दक्षिण-पश्चिम कोण में
हरियाली बगीचा या छोटे छोटे पोधे
भी शुगर का कारण है।
—–घर/भवन का दक्षिण-पश्चिम कोना बड़ा हुआ है तब
भी शुगर आक्रमण करेगी।
—–यदि दक्षिण-पश्चिम का कोना घर में सबसे छोटा या सिकुड
भी हुआ है तो समझो मधुमेह का द्वार खुल गया।
——दक्षिण-पश्चिम भाग घर या वन की ऊँचाई से सबसे
नीचा है मधुमेह बढेगी. इसलिए यह भाग
सबसे ऊँचा रखे।
——-दक्षिण-पश्चिम भाग में सीवर
का गड्ढा होना भी शुगर को निमंत्रण देना है।
——ब्रह्म स्थान अर्थात घर का मध्य भाग
भारी हो तथा घर के मध्य में अधिक लोहे का प्रयोग
हो या ब्रह्म भाग से
जीना सीडीयां ऊपर कि और
जा रही हो तो समझ ले कि मधुमेह का घर में आगमन
होने जा रहा हें अर्थात दक्षिण-पश्चिम भाग यदि आपने सुधार
लिया तो काफी हद तक आप असाध्य रोगों से मुक्त
हो जायेगे..
मधुमेह/शुगर या डायबिटीज के उपचार के लिए वास्तु
नियम—
------अपने भूखंड और भवन के बीच के स्थान में
कोई स्टोर, लोहे का जाल या बेकार का सामान
नही होना चाहिए, अपने घर क़ी उत्तर-
पूर्व दिशा में नीले फूल वाला पौधा लगाये..
——अपने बेडरूम में कभी भी भूल कर
भी खाना ना खाए।
——अपने बेडरूम में जूते चप्पल नए या पुराने बिलकुल
भी ना रखे।
——मिटटी के घड़े का पानी का इस्तेमाल करे
तथा घडे में प्रतिदिन सात तुलसी के पत्ते डाल कर उसे
प्रयोग करे।
—–दिन में एक बार अपनी माता के हाथ का बना हुआ
खाना अवश्य खाए।
—–अपने पिता को तथा जो घर का मुखिया हो उसे पूर्ण सम्मान दे।
——प्रत्येक मंगलवार को अपने मित्रों को मिष्ठान जरूर दे।
----वृहस्पति देव
की हल्दी की एक गाँठ लेकर
एक चम्मच शहद में सिलपत्थर में घिस कर सुबह
खाली पेट पीने से मधुमेह से मुक्त
हो सकते है।
——रविवार भगवान सूर्य को जल दे कर यदि बन्दरों को गुड खिलाये
तो आप स्वयं अनुभव करेंगे की मधुमेह शुगर
कितनी जल्दी जा रही है।
——ईशानकोण से लोहे की सारी वस्तुए
हटा ले।
इन सब के करने से आप मधुमेह मुक्त हो सकते है.
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डायबिटीज का ज्योतिषीय उपचार---
01 .---ज्योतिषीय उपाय :----
मधुमेह (डायबिटीज) एक वंशानुगत रोग
भी है। शरीर में जब इंसुलिन
की कमी हो जाती है, तो यह
रोग होता है। दवाओं से इसको काबू किया जा सकता है।
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जलीय
राशि कर्क, वृश्चिक या मीन एवं शुक्र
की राशि तुला में दो अथवा अधिक पापी ग्रह
हों तो इस रोग की आशंका होती है। शुक्र
के साथ ही बृहस्पति या चंद्रमा के दूषित होने, त्रिक्
भाव में होने तथा शत्रु राशि या क्रूर ग्रहों (राहु, शनि, सूर्य व
मंगल) से दृष्ट होने से भी यह रोग होता है।
02 .--ज्योतिषीय उपाय :----
मधुमेह होने पर शुक्रवार को सफेद कपड़े में श्रद्धानुसार सफेद
चावल का सोलह शुक्रवार तक दान करना चाहिए। यह दान
किसी मंदिर या जरूरतमंद व्यक्ति को करना चाहिए। साथ
ही "ओम शुं शुक्राय नम:" मंत्र की एक
माला निरंतर करनी चाहिए। इसी प्रकार
बृहस्पति व चंद्रमा की वस्तुओं का दान
किया जाना चाहिए। शाम को या रात्रि में महामृत्युंजय मंत्र
की माला करनी चाहिए। पुष्य नक्षत्र में
संग्रह किए गए जामुन का सेवन करने व करेले का पाउडर सुबह
दूध के साथ लेने से लाभ होता है।
अनुभूत ग्रह स्थितियां :----
कई बार ऐसे जातक भी देखने में आए हैं
जिनकी कुंडली में लग्न पर शनि-केतु
की पाप दृष्टि होती है। चतुर्थ स्थान में
वृश्चिक राशि में शुक्र-शनि की युति, मीन पर
सूर्य व मंगल की दृष्टि और तुला राशि पर राहु स्थित
होकर चंद्रमा पर दृष्टि रखे, ऐसे में जातक प्रतिष्ठित, लेकिन
डायबिटीज से भी पीड़ित
होता है।
प्रमुख कारण :----
ज्योतिष के अनुसार यदि मीन राशि में बुध पर सूर्य
की दृष्टि हो या बृहस्पति लग्नेश के साथ छठे भाव में
हो या फिर दशम भाव में मंगल-शनि की युति या मंगल
दशम स्थान पर शनि से दृष्ट हो, तो यह रोग होता है। इसके
अतिरिक्त लग्नेश शत्रु राशि में, नीच का या लग्न व
लग्नेश पाप ग्रहों से दृष्ट हो व शुक्र अष्टम में विद्यमान हो।
कुछ मामलों में चतुर्थ भाव में वृश्चिक राशि मधुमें शनि-शुक्र
की युति भी डायबिटीज का कारण
होती है।
शुभ नक्षत्रों में औषधि सेवन और हवन :----
नवीन औषधि का आरंभ अश्विनी, पुष्य,
हस्त और अभिजीत नक्षत्रों में करना शुभ है।
गोचरीय ग्रहों की अशुभता को शुभ करने के
लिए औषधीय स्नान करना चाहिए। ग्रहों के दूषित होने
पर हवन करवाना शुभ है। सूर्य की शांति के लिए
समिधा, आक या मंदार की डाली ग्रहण
करनी चाहिए। चंद्रमा के लिए पलाश, मंगल के लिए खदिर
या खैर, बुध के लिए अपामार्ग या चिचिढ़ा, गुरु के लिए
पीपल, शुक्र के लिए उदुम्बर या गूलर, शनि के लिए
खेजड़ी या शमी, राहु के लिए दूर्वा तथा केतु
के लिए कुशा की समिधा, सरल, स्निग्ध
डाली हवन के लिए ग्रहण करनी चाहिए
और ग्रहों के मंत्रों के साथ यज्ञाहुतियां देनी चाहिए।

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