कुंडली मिलान
विवाह के लिए अष्टकूट मिलान कुंडली मिलान में
अष्टकूट मिलान होना जरूरी है प्रत्येक का नाम व
अंक अलग अलग है इन का कुल जोड़ 36 होता है l इन में से
16 गुण से कम मिलें तो मिलान नहीं करना चाहिए 16
से 21 के मध्य मिले तो मिलान माध्यम 21 से 28 हों तो मिलान
अच्छा है 28 से 36 हों तो मिलान उत्तम मानना चाहिए इन का
विवरण यह है कि पहले गुणों में से वर्ण ,वश्य, तारा, योनि ,
ग्रह मैत्री, गण मैत्री , भ्रकुट व
नाड़ी आदि का विचार कर के ही लड़का व
लड़की के मिलान का फलित करना चाहिए साथ में उन कि
जन्म कुंडली में लग्न , चन्द्र , चलित , नवमांश व
सप्तमांश कुंडली व उस में पड़े ग्रह पर विचार कर के
फलित करना चाहिए कि दोनों लड़का व लड़की विवाह
योग्य हैं या नहीं अगर कोई दोष है तो उस का उपाय
है या नहीं आगे के जीवन काल में उन्हें
क्या कोई कष्ट होगा या नहीं के साथ साथ मांगलिक जो
कि दोनों कि कुंडली से देख कर तय करना चाहिए कि दोनों
का दाम्पत्य जीवन सुखी रहेगा या
नहीं उन का अपने ,अपने परिवार , समाज , संतान व
धन मान पर क्या असर होगा l
मंगल मिलान
अक्सर किसी का जन्म मंगलवार हो तो माता पिता उस को
मांगलिक मान लेते है पर यह सही नहीं
क्योकि मंगलवार से जातक का मांगलिक होने का कोई सम्बन्ध
नहीं जबकि ऐसा मानना उस जातक के लिए
मुसीबत बन जाता है उसकी
शादी आदि कार्यो में परेशानिया आती है कोई
मांगलिक मान कर तो कोई मांगलिक न मान कर बाते करता है मांगलिक
जातक तब होता है जब मंगल कुंडली में
1,2,4,7,8,12 भाव में किसी भी शुभ
ग्रह से न देखा जाए या कुंडली में मांगलिक दोष का कोई
परिहार न होता हो तब मांगलिक माना जाता है मांगलिक को पूर्ण रूप
से जानकर ही मंगल के बारे में जातक को बताना चाहिए
नही तो मांगलिक न होते हुए उसे मांगलिक बना देना
घातक सिद्ध होता है l कभी कभी
मांगलिक होना भी शुभ होता है या मांगलिक होते हुए
जब दूसरी कुंडली का सार निकल जाता है
तो मांगलिक कट जाता है व उनका दम्पत्य जीवन
सुखी हो जाता है l किन भावो में मंगल होने पर
मांगलिक मानते है यह हमने पहले बताया है पर उस में
भी मंगल का बल जरुर देखना चाहिए l
कुंडली मिलन में भी मंगल के बलाबल को
देख कर ही मांगलिक माने यह भी जानना
जरूरी है कि कोण से योग या परिहार से यह दोष भंग
हो रहा है और इस का दाम्पत्य जीवन पर कितना
प्रभाव होगा वैसे तो मांगलिक दोष लग्न कुंडली में
अधिक प्रभावित होता है पर पूर्ण रूप से जानने के लिए नवमांश,
शुक्र , चन्द्र व सूर्य कुंडली से भी देखा
जरूरी है
मंगल दोष के कुछ परिहार (काट )इस प्रकार है>
मेष का मंगल लग्न में, वृश्चिक का मंगल चोथे में, वृष का मंगल
सप्तम में , कुम्भ का मंगल आठवे में ,धनु का मंगल बारवे में हो तो
मांगलिक दोष नहीं होता l अपनी
राशी मेष वृश्चिक ,मूल त्रिकोण व उच्च
राशी मकर , मित्र ( सूर्य ) राशी सिंह
,मित्र (गुरु ) राशी धनु मीन , मित्र
(चन्द्र ) राशी कर्क में मंगल हो तो मांगलिक दोष
नहीं होता
सूर्य राहू केतु यदि 1, 4 ,7, 8, 12 भाव में हो तो मंगल दोष
नहीं होता
3, 6, 11 भाव में अशुभ ग्रह हो , केंद्र में व त्रिकोण में शुभ
ग्रह हो तो मंगल दोष नहीं रहता
चॊथे भाव में शुक्र की वृष या तुला राशि में मंगल दोष
नहीं होता l
आठवें भाव में गुरु की धनु या मीन राशि में
मंगल दोष नहीं होता l
बारवें भाव में बुध की मिथुन या कन्या राशि में मंगल दोष
नहीं रहता l
शुक्र दुसरे भाव में हो तो मंगल दोष नहीं होता l
चन्द्र या गुरु केंद्र में हो तो मांगलिक दोष नहीं रहता
l
सातवें घर का मालिक सातवे घर में हो तो मंगल दोष नहीं
रहता l
गुरु व शुक्र बलवान हो 1, 4, 7, 8, 12 में मंगल हो तो दोष
नहीं होता l
चन्द्र , बुध , गुरु ,सूर्य, राहू यदि मंगल के साथ हो तो मांगलिक
दोष नहीं होता l
मंगल गुरु से दृष्ट हो तो मंगल दोष नहीं रहता l
मंगल यदि केतु के नक्षत्र (अश्वनी ,मघा , मूला ) में
हो तो मांगलिक दोष नहीं होता
मंगल यदि शुक्र कि राशी में हो सप्तमेश बलि हो कर
केंद्र या त्रिकोण में हो तो मांगलिक दोष नहीं होता है
l
और भी कई ऐसे योग हैं जो पूर्ण विश्लेष्ण के बाद
मांगलिक योग को भंग कर पूर्ण सुख देते हैं
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रविवार, मई 13, 2018
कुंडली मिलान
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