सोमवार, मई 14, 2018

ज्योतिष में शुक्र रत्न हीरा का महत्व

ज्योतिष में शुक्र रत्न हीरा का महत्व

हीरा रत्न, शुक्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है ! यह एक अत्यंत प्रभावशाली रत्न होता है और इसका बहुत छोटा आकार भी बाज़ार में काफी कीमत रखता है ! ज्यदातर हीरा स्त्री वर्ग का पसंदीदा रत्न है ! और हो भी क्यों न, ज्योतिष के अनुसार शुक्र को भी सुन्दरता और स्त्री वर्ग के साथ जोड़ा गया है ! शुक्र गृह सुन्दरता, वैभव और एश्वर्य तथा भोग विलास का गृह है ! सुखी ववाहिक जीवन के लिए भी शुक्र गृह का शुभ स्थिति में होना आवश्यक है !
दुनिया के इस अति मूल्यवान रत्न की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं, जो इसे एस्ट्रोलॉजी के लिहाज़ से बेहद महत्वपूर्ण बनाती हैं। खास बात ये है कि इसकी पॉजिटिव एनर्जी जितनी तेजी से अपना असर छोड़ती है, उससे कहीं अधिक तेजी से इसकी निगेटिव ऊर्जा प्रभाव दिखलाती है। यही कारण है कि हीरा अथवा डायमंड ही ऐसा रत्न है, जिसे केवल आभूषण के रूप में पहनने की गलती नहीं करनी चाहिए।
डायमंड की सबसे खास बात है इससे निकलने वाली ऊर्जा किरण शरीर पर रिफ्लेक्शन के द्वारा ही प्रभाव कर जाती है। इसीलिए इसको अंगूठी के रूप में पहनने के लिए हीरे का अंगुली से स्पर्श करना बिल्कुल जरूरी नहीं है। ये ऊपर से ही अपना प्रभाव दिखला जाएगा।

ज्योतिष में हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है । हीरा धरती का सबसे कठोर पदार्थ है।   हीरे के मूल्य का calculation  4C से किया जाता है । 4C का मतलब होता है cut , clarity , carat  और color  ।

सामान्य रूप से हाफ कैरट से एक कैरेट के बीच का हीरा एस्ट्रोलॉजिकल रेमेडी के लिए कारगर सिद्ध होता है। यदि कोई व्यक्ति half carat से कम वजन का हीरा धारण करे तो सामान्यतया इतना रिजल्ट नहीं मिलता वह व्यर्थ सिद्ध हो जाता है। इसलिए इस बात की सावधानी जरूर बरतनी चाहिए कि कोई भी डायमंड पहनने के लिए उसका वजन रिकमंडेड सीमा में हो साथ ही उस में किसी भी तरह के दोष ना हों।

इसके धारण करने से आयु वृद्धि जीवन रक्षा, स्वास्थ्य लाभ, व्यापार में लाभ एवं अन्य शुभ फल प्राप्त होते हैं।

इसके अलावा भी जो व्यक्ति नींद में चौंक जाता हो, भूत एवं पिशाच का डर लगता हो, शारीरिक दृष्टि से कमजोर हो, उसे कुंडली चैक करवाके हीरा धारण करना चाहिए।

प्रेमी या प्रेमिका या सामने वाले को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हीरे की अंगूठी स्वयं भी पहननी चाहिए एवं उपहार में देनी चाहिए ।

जिस घर में पति-पत्नी का विवाद तथा घर में कलह का वातावरण रहता हो उन्हें हीरा धारण करना चाहिए। हीरा अपनी खूबियों से दोनों में प्रेम का बीज बो देता है।

हीरे के विषय में अद्भुत बात यह है कि

हीरे से हीरा कट सकता है अन्य रत्नों से हीरा नहीं काटा जा सकता है।

पृथ्वी में जितने भी रत्न हैं अथवा लौह आदि जितनी भी धातुएं हैं, हीरा उन सभी में चिन्ह कर सकता है अन्य कोई धातु हीरे में चिन्ह करने में समर्थ नहीं है।

स्वाभाविक हीरे के अतिरिक्त हीरक तथा मुक्तादि जितने प्रकार के रत्न हैं, उनमें किसी भी रत्न की प्रभा ऊघ्र्वगामिनी नहीं होती। एकमात्र हीरा ही ऎसा रत्न है जिसकी प्रभा ऊपर की ओर जाती है।

हीरा रत्न धारण करने की विधि :

यदि आप शुक्र देव का रत्न हीरा धारण करना चाहते है, तो 0.50 से 2 कैरेट तक के हीरे को चाँदीया सोने की अंगूठी में जड्वाकर किसी भी शुक्लपक्ष के शुक्रवार को सूर्य उदय के पश्चात अंगूठी को दूध, गंगा जल, शक्कर और शहद के घोल में डाल दे! उसके बाद पाच अगरबत्ती शुक्रदेव के नाम जलाये और प्रार्थना करे की हे शुक्र देव मै आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न,हीरा धारण कर रहा हूँ , कृपया करके मुझे आशीर्वाद प्रदान करे! तत्पश्चात अंगूठी को निकाल कर ॐ शं शुक्राय नम: का 108 बारी जप करते हुए अंगूठी को अगरबत्ती के उपर से घुमाए फिर मंत्र के पश्चात् अंगूठी को लक्ष्मी जी  के चरणों से लगाकर कनिष्टिका या मध्यमा  ऊँगली में धारण करे! 

हीरा धारण नहीं करने की दशा में White Sapphire (सफ़ेद पुखराज) पहना जा सकता है यां हीरे के उपरत्न वाइट टोपाज, स्फटिक , क्रिस्टल  कुरंगी, दतला सिम्मा सोटेक धारण करना चाहिए।

नोट :
अब यदि खराब शुक्र की दशा मौज़ूद हो तो उस शुक्र का पॉवर बढ़ाने से जीवन में गड़बड़ी इतनी बढ़ जाएगी कि उसे संभालना मुश्किल हो जाएगा। यानि नीच, अस्त, शत्रु गृही अथवा कुण्डली के छः, आठ व बारहवें भाव में बैठे या शुक्र अशुभ सम्बन्ध और अशुभ फलदायक हो तो शुक्र का पॉवर बढ़ाने की भूल नहीं की जानी चाहिए। अब ऐसी अवस्था में किसी ने भी भूलवश हीरा पहन लिया तो उसके लिए यह विनाशकारी साबित हो जाता है।

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